गोदरमाना : रंका प्रखंड के गोदरमाना से रमकंडा प्रखंड के बलिगढ़ पंचायत तक लगभग 13 किलोमीटर सड़क की स्थिति काफी दयनीय हो चुकी है. इन सड़कों पर अन्या वाहन तो क्या, साइकिल चलाना भी मुश्किल है. रास्ता खराब रहने के कारण बलिगढ़ से गोदरमाना आने में एक से डेढ़ घंटा लग जाता है. बलिगढ़ पंचायत से गोदरमाना पहुंचने में तीन किमी तक सड़क बिल्कुल ही खराब है. यहां सड़क पर केवल पत्थर ही पत्थर नजर आते हैं, जिस पर नंगे पांव भी चलना मुश्किल है.
सड़क ऐसी कि साइकिल चलाना भी है मुश्किल
गोदरमाना : रंका प्रखंड के गोदरमाना से रमकंडा प्रखंड के बलिगढ़ पंचायत तक लगभग 13 किलोमीटर सड़क की स्थिति काफी दयनीय हो चुकी है. इन सड़कों पर अन्या वाहन तो क्या, साइकिल चलाना भी मुश्किल है. रास्ता खराब रहने के कारण बलिगढ़ से गोदरमाना आने में एक से डेढ़ घंटा लग जाता है. बलिगढ़ पंचायत […]

उसके आगे होमिया, दुर्जन, चुटिया तथा हाटदोहर गांव को ये सड़क जोड़ती है. इन गांवों को जोड़नेवाली इस सड़क पर हजारों गड्ढे बन चुके हैं. ग्रामीणों के मुताबिक इस सड़क पर लगभग 25 वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत मात्र तीन किमी गोदरमाना और चुटिया के बीच कालीचरण सड़क का निर्माण कराया गया था. इसके बाद फिर आज तक उसकी कोई मरम्मत नहीं हुई. इसके कारण सड़क पूरी तरह से गड्ढे में तब्दील हो गयी है.
बलिगढ़ निवासी कृष्णा पांडेय, ललन पांडेय, प्रभुनाथ पांडेय, रामलाल भुइयां, सुकन भुइयां, सरजू भुइयां, दुर्गा भुइयां, रामलाल भुइयां, वीरेंद्र पांडेय, अनूप यादव, संतोष यादव, रामधनी सिंह, बीगन उरांव, गंगा गौड़ सहित कई व्यक्तियों ने इसपर रोष व्यक्त करते हुए कहा कि उनलोगों को आज भी किसी महिला को अचानक प्रसव होने या बीमार होने पर हॉस्पिटल तक ले जाने के लिए वाहन भी आने के लिए तैयार नहीं होते हैं. इसके कारण उन लोगों को मजबूर होकर डोली-खटोली में मरीजों को लेकर रामानुजगंज हॉस्पिटल जाना पड़ता है.