वनतुलसी का पौधा बदल सकती है गढ़वा की तसवीर

वनतुलसी से तैयार होता है औषधीय गुणों से भरपूर सबसे बेहतर मधु गढ़वा जिले में बढ़ रहा है मधुमक्खी पालन गढ़वा : गढ़वा जिले के सभी गावों, मेढ़ों व जंगलों में झाड़ी के रूप में बहुतायात मात्रा में विद्यमान बनतुलसी गढ़वा जिले के लोगों की तकदीर बदल सकती है़. वनतुलसी से बना मधु दुनिया की […]

वनतुलसी से तैयार होता है औषधीय गुणों से भरपूर सबसे बेहतर मधु

गढ़वा जिले में बढ़ रहा है मधुमक्खी पालन

गढ़वा : गढ़वा जिले के सभी गावों, मेढ़ों व जंगलों में झाड़ी के रूप में बहुतायात मात्रा में विद्यमान बनतुलसी गढ़वा जिले के लोगों की तकदीर बदल सकती है़. वनतुलसी से बना मधु दुनिया की सबसे बेहतरीन मधु में टॉप पर है़. तुलसी के गुण होने की वजह से इसका औषधीय महत्व है़. गढ़वा जिले में हाल के दिनों में वनतुलसी एवं इससे तैयार मधु के महत्व को समझने के बाद मधुमक्खी पालन उद्योग का रूप लेने की ओर बढ़ रहा है़ पांच साल पहले तक गढ़वा जिले में मधुमक्खी पालन नहीं किया जाता था़. लेकिन अब इस जिले में बिहार के विभिन्न जिलों से लोग यहां आकर नवंबर व दिसंबर के महीने में मधुमक्खी पालन करने लगे है़ं. बाहरी लोगों की देखादेखी स्थानीय लोग भी अब इस धंधे को अपनाने लगे है़ं. इस संबंध में कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से भी पहल कर कई किसानों को प्रोत्साहित किया गया है़. कृषि विज्ञान केंद्र गढ़वा के प्रधान वैज्ञानिक डॉ अशोक कुमार ने बताया कि वनतुलसी के पौधे को गढ़वा जिले के लोग बेकार समझते है़ं. लेकिन यह भरपुर औषधीय गुणवाला है़ वनतुलसी की झाड़ी के आसपास में मधुमक्खी के बक्से लगाये जाने के बाद मधुमक्खी उससे पराग करती हैं और फिर मधु तैयार करती है़ं यह तैयार मधु औषधीय गुणों से युक्त होता है़ . उन्होंने बताया कि थोड़ी सी जगह में भी इस व्यवसाय को किया जा सकता है़. मेडिसनल वैल्यू होने की वजह से लोग सामान्य मधु की तुलना में इसे उंचे दामों में खरीदते है़ं. उन्होंने बताया कि मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से निशुल्क दिया जाता है़ इसके बाद इस व्यवसाय को प्रारंभ किया जा सकता है़.

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