पीयूष तिवारी, गढ़वा : गढ़वा सदर अस्पताल सहित जिले के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में आउटसोर्सिंग पर बहाल कर्मी घोर आर्थिक विपन्नता व शोषण की स्थिति से गुजर रहे हैं. उन्हें 11 महीने से मानदेय नहीं दिया गया है. मानदेय नहीं मिलने से उनके अंदर आउटसोर्सिंग संस्था के खिलाफ नाराजगी भी है.
उल्लेखनीय है कि गढ़वा सदर अस्पताल व अन्य अस्पतालों को मिला कर कुल 447 कर्मी सेवारत हैं. इनकी शिकायत यह भी है कि स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को अंजाम देने के बावजूद उन्हें अत्यंत कम मानदेय दिया जाता है. अस्पताल में ड्रेसर, लैब तकनीशियन, फार्मासिस्ट, कंप्यूटर ऑपरेटर, एक्सरे तकनीशियन, स्वीपर के अलावा वार्ड बॉय के पद पर युवक-युवतियों को बहाल किया गया है.
बताया गया कि इनमें से ड्रेसर व लैब तकनीशियन व एक्सरे तकनीशियन को 6500-6500 के हिसाब से मानदेय दिया जाता है. जबकि वार्ड ब्यॉय, सफाईकर्मी आदि को 4000 से 4500 रुपये तक मानदेय दिया जा रहा है. सभी कर्मी 2015 नवंबर माह से अपनी सेवा दे रहे हैं. लेकिन उनका मानदेय नहीं बढ़ाया जा रहा है.
इसके अलावा बहाल कराते समय उन्हें कहा गया था कि राशि खाते में भेजी जायेगी और पीएफ भी काटी जायेगी. लेकिन दोनों ही शर्तों को पूरा नहीं किया गया है. उन्हें जब नकद राशि दी जाती है, तब पेंसिल से लिख कर उसके नीचे हस्ताक्षर कराया जाता है और बाद में मिटा कर ज्यादा राशि भर दी जाती है.
उपायुक्त को आवेदन सौंपा
इस संबंध में आउटसोर्सिंग कर्मियों की समस्याओं को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता नवलेश धरदुबे ने उपायुक्त को दिये आवेदन में कहा है कि जिले के सभी अस्पताल प्रबंधन का दायित्व सर्वांगीण ग्रामीण विकास समिति को दिया गया है़. लेकिन संस्था की ओर से बेरोजगार युवकों का शोषण करते हुए उन्हें अत्यंत ही अल्प मानदेय दिया जाता है.
जबकि उनके नाम पर ज्यादा राशि की निकासी की जाती है. श्रीधरदुबे ने उपायुक्त से मानवता के आधार पर बेरोजगारों को संतोषजनक मानदेय देने तथा जनवरी से बकाये मानदेय का एक मुश्त भुगतान करने की मांग की है.
आरोप गलत है : विनोद
इधर इस संबंध में सर्वांगीण ग्रामीण विकास समिति के सचिव विनोद सोनी ने कहा कि उनकी संस्था पर लगाये गये आरोप गलत हैं. आवंटन के अभाव में मानदेय का भुगतान नहीं किया गया था. लेकिन इसी माह में भुगतान कर दिया जायेगा.
