सरकार की सरेंडर पॉलिसी से हुए प्रभावित, टीपीसी के दो इनामी उग्रवादियों ने किया सरेंडर

गढ़वा : टीपीसी के दो इनामी उग्रवादियों ने सोमवार को सरेंडर कर दिया. इनमें पांच लाख रुपये का इनामी टीपीसी-टू का नेतृत्वकर्ता महेंद्र सिंह खरवार और दो लाख रुपये का इनामी टीपीसी उग्रवादी अशोक कुमार उर्फ अक्षय है. दोनों ने डीआइजी विपुल शुक्ला के समक्ष आत्मसमर्पण किया. महेंद्र सिंह खरवार ने राइफल के साथ सरेंडर […]

गढ़वा : टीपीसी के दो इनामी उग्रवादियों ने सोमवार को सरेंडर कर दिया. इनमें पांच लाख रुपये का इनामी टीपीसी-टू का नेतृत्वकर्ता महेंद्र सिंह खरवार और दो लाख रुपये का इनामी टीपीसी उग्रवादी अशोक कुमार उर्फ अक्षय है. दोनों ने डीआइजी विपुल शुक्ला के समक्ष आत्मसमर्पण किया. महेंद्र सिंह खरवार ने राइफल के साथ सरेंडर किया.
पुलिस लाइन (गढ़वा) में आयोजित कार्यक्रम में दोनों उग्रवादियों को इनाम की राशि का चेक प्रदान किया गया. महेंद्र सिंह खरवार के खिलाफ कुल 44 मामले दर्ज है़ं जबकि अक्षय के खिलाफ 18 मामले दर्ज है़ं इस मौके पर डीआइजी विपुल शुक्ला ने कहा कि सरकार की आत्मसमर्पण नीति नयी दिशा से प्रभावित होकर दोनों ने सरेंडर किया है़
सब जोनल कमांडर रह चुका है महेंद्र सिंह खरवार : भाकपा माओवादी के कोयल शंख जोन के सबजोनल कमांडर एवं वर्तमान में टीपीसी-टू का नेतृत्व कर रहे लालधारी सिंह उर्फ महेंद्र सिंह खरवार ने कहा कि उसने 2004 में भाकपा माओवादी ज्वाइन किया था़ वहां 2008 तक सह सक्रिय रहा़ इसके बाद उसकी गिरफ्तारी हुई और वह जेल चला गया़
  • पांच लाख रुपये का इनामी है टीपीसी-टू का महेंद्र सिंह खरवार
  • दो लाख रुपये का इनामी है अशोक मेहता उर्फ अक्षयजी
  • महेंद्र सिंह खरवार पर 44 तथा अक्षय पर 18 मामले हैं दर्ज
उसने बताया कि जेल से निकलने के बाद उसने टीपीसी टू नामक संगठन बनाया था़ उसने कहा कि नक्सली जीवन दुर्दशा से भरी हुई है़ वह आत्मसमर्पण करने से पहले सोचता था कि पुलिस उसे धोखा देकर उसका एनकांउटर कर देगी़ लेकिन झारखंड सरकार की सरेंडर नीति काफी सही है़ उसने कहा कि अन्य भटके हुए लोग भी इस सरेंडर पॉलिसी का लाभ लेते हुए मुख्य धारा में लौट जाये़ं महेंद्र सिंह खरवार चैनपुर के करसो गांव का रहनेवाला है़
पार्टनर से विवाद के बाद बना माओवादी : टीपीसी से जुड़े अशोक कुमार मेहता उर्फ अक्षय ने कहा कि एक पार्टनर के साथ हुए विवाद के बाद 2004 में भाकपा माओवादी संगठन से जुड़ा था. उसने बताया कि 2006 में उसे सबजोनल कमांडर बनाकर गढ़वा भेजा गया था़ इसके कुछ दिन बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया़ गिरफ्तारी के बाद वह औरंगाबाद के नरारी स्थित अपने घर पर रह रहा था़ साल 2013 में उसे पुलिस का मुखबिर बताते हुए माओवादियों की ओर से आत्महत्या की धमकी दी गयी थी़
धमकी से डरकर वह टीपीसी में शामिल हो गया था़ उसने बताया कि डीआइजी विपुल शुक्ला से बात होने के बाद वह सरकार की सरेंडर पॉलिसी से प्रभावित हुआ और आत्मसमर्पण किया है़ इस मौके पर गढ़वा के उपायुक्त हर्ष मंगला, एसपी शिवानी तिवारी, अभियान एसपी सदन कुमार, सीआरपीएफ के डिप्टी कमांडेंट वाइके मिश्रा, द्वितीय कमांडेंट विजय शंकर, एसडीपीओ गढ़वा ओमप्रकाश तिवारी आदि उपस्थित थे़ संचालन रंका एसडीपीओ विजय कुमार ने किया़

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