मॉनसून के करवट बदलने से नहीं हो पा रही है धान के बिचड़े की बुआई

गढ़वा : गढ़वा जिले में अभीतक मॉनसून की स्थिति कृषि के अनुकूल नहीं दिख रही है. इसके कारण किसान इस साल की खेती को लेकर चिंतित दिखने लगे हैं. इस साल मॉनसून विभाग की भविष्यवाणी से किसान अपनी खेती को लेकर काफी उत्साहित दिख रहे थे. मौसम विभाग ने इस साल सामान्य बारिश और समय […]

गढ़वा : गढ़वा जिले में अभीतक मॉनसून की स्थिति कृषि के अनुकूल नहीं दिख रही है. इसके कारण किसान इस साल की खेती को लेकर चिंतित दिखने लगे हैं. इस साल मॉनसून विभाग की भविष्यवाणी से किसान अपनी खेती को लेकर काफी उत्साहित दिख रहे थे. मौसम विभाग ने इस साल सामान्य बारिश और समय से पूर्व मॉनसून के आने की भविष्यवाणी की थी. भविष्यवाणी के हिसाब से झारखंड से सबसे पश्चिम सीमा पर अवस्थित गढ़वा जिले में 12 जून तक मॉनसून को आ जाना चाहिए था. लेकिन जब 12 जून के आसपास मॉनसून का आगमन नहीं हुआ, तो कहा गया कि हवा का दबाव कम पड़ने की वजह मॉनसून ठिठक गया है.

अब मॉनसून के आने में 10 दिनों का और विलंब हो सकता है. इसके बाद अनुमान लगाया गया कि अब मॉनसून 23 जून तक आयेगा. इसके बाद 23 जून भी बीत गया. इस बीच 22 जून को आद्रा नक्षत्र भी चढ़ गया. लेकिन एक भी अच्छी बारिश गढ़वा जिले में नहीं हुई. यदा-कदा खंड बारिश हुई. मौसम विभाग ने एक बार फिर कहा कि मॉनसून सक्रिय हो चुका है. पूरे झारखंड में 28 जून से तीन दिनों तक भारी बारिश होगी. लेकिन किसान भारी बारिश का इंतजार करते रह गये.

यद्यपि कुछेक क्षेत्रों में छिटफुट बारिश होकर रह गयी. मौसम विभाग के मुताबिक अभी भी भारी बारिश के लक्षण बताये जा रहे हैं. लेकिन हकीकत है कि गढ़वा जिले के लोग भारी उमस के बीच पूरी तरह से सूखे का सामना कर रहे हैं. यद्यपि आकाश में यदा-कदा बादल के घुमड़ने से किसानों को मौंसम विभाग की भविष्यवाणी को सही साबित होने की आश जग जाती है. लेकिन अभी तक किसानों को सिर्फ निराशा ही हुई है. खबर के मुताबिक झारखंड प्रांत के कई जिलों में अच्छी बारिश हुई है. इससे एक बार पुन: इस बात को बल मिलता है कि पलामू और गढ़वा वृष्टिछाया में पड़ने के कारण यहां आद्रा नक्षत्र की बारिश नहीं हुई.

मॉनसून के विलंब होने से किसान परेशान : मौनसून का बिलंब होना और आद्रा नक्षत्र में वर्षा की दयनीय स्थिति किसानों के खेती के सारे उत्साह को ठंडा करने लगा है. गौरतलब है कि गढ़वा जिला की कृषि पूरी तरह से मॉनसून पर निर्भर है. यहां किसानों को लगभग हर साल सूखा और तीन साल के अंतराल में अकाल का सामना करना पड़ता है. इसके कारण कुछ प्रतिशत किसानों को छोड़कर अधिकांश किसान मॉनसून के रुख को देखते हुए अपनी खेतों में बिचड़े की बुआई करते हैं.
फिलहाल यहां के प्रमुख फसल मकई सहित सारे भदई फसलों और धान के बिचड़े की बुआई का समय चल रहा है. मॉनसून की स्थिति इस प्रकार की स्थिति को देखते हुए ही किसान अपने धान के बिचड़े की बुआई करेंगे. क्योंकि उनके खेत, आहर आदि के भरने भर पर्याप्त बारिश नहीं होने पर उनके बिचड़े रोपे जाने की बजाय खेतों में ही सूखे रह सकते हैं. इसलिए किसान पूरी तरह से मॉनसून का रूख भांपने में लगे हुए हैं. यद्यपि पिछले दिन की छिटफुट बारिश के बाद खेतों में आयी नमी के बाद किसान अपनी भदई फसल की बुआई शुरू कर चुके हैं.

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