अाय से अधिक संपत्ति के मामले में हुई कार्रवाई, प्रतिवेदन जमा करने का निर्देश

गढ़वा: झारखंड लोकायुक्त के अवर सचिव ने उपायुक्त गढ़वा से समाज कल्याण विभाग के सहायक एवं अधिकारियों पर आय से अधिक संपत्ति के मामले में की गयी कार्रवाई से संबंधित प्रतिवेदन की मांग की है़ इसमें उन्होंने मुख्य रूप से तत्कालीन कार्यालय सहायक मुरारी मिश्रा से संबंधित फलाफल प्रतिवेदन की मांग की है़ उल्लेखनीय है […]

गढ़वा: झारखंड लोकायुक्त के अवर सचिव ने उपायुक्त गढ़वा से समाज कल्याण विभाग के सहायक एवं अधिकारियों पर आय से अधिक संपत्ति के मामले में की गयी कार्रवाई से संबंधित प्रतिवेदन की मांग की है़ इसमें उन्होंने मुख्य रूप से तत्कालीन कार्यालय सहायक मुरारी मिश्रा से संबंधित फलाफल प्रतिवेदन की मांग की है़ उल्लेखनीय है कि समाज कल्याण विभाग में साल 2010 में सेविका एवं सहायिका चयन के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितता बरतने, भ्रष्टाचार अपनाने एवं आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाते हुये सामाजिक कार्यकर्ता रामचरितर चौधरी ने इसकी जांच कराने की मांग की थी़.

इसके आलोक में लेखा प्रशासन एवं स्वनियोजन निदेशक डीआरडीए सह नोडल पदाधिकारी अशोक कुमार शर्मा ने इसकी जांच की थी़ जांच के दौरान तत्कालीन समाज कल्याण पदाधिकारी उमाशंकर राउत, सीडीपीओ आरती कुमारी, समाज कल्याण विभाग के सहायक राजकुमार प्रसाद, मुरारी मिश्रा एवं सीडीपीओ कार्यालय गढ़वा के अनुदेशक अनिल कुमार को आरोपी बनाते हुये कार्रवाई के लिये उपायुक्त को लिखा था. तत्कालीन उपायुक्त ने इस पर कार्रवाई करते हुये लोकायुक्त को पत्रांक 1561, दिनांक एक सितंबर 2012 के माध्यम से कार्रवाई के लिये भेजा था़.

इसके आधार पर सभी आरोपियों की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के माध्यम से आय से अधिक संपत्ति की जांच करायी गयी थी़ एसीबी ने अपनी जांच में तत्कालीन गढ़वा सीडीपीओ आरती कुमारी एवं समाज कल्याण विभाग के कार्यालय सहायक राजकुमार प्रसाद के विरूद्ध आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले की पुष्टि की थी़ इसमें आरती कुमारी पर आय से अधिक 1820982 रूपये की संपत्ति अर्जित करने तथा सहायक राजकुमार प्रसाद पर आय से अधिक 1746269 रूपये की संपत्ति अर्जित करने का मामला पाया था़ जबकि अन्य आरोपियों में समाज कल्याण पदाधिकारी उमाशंकर राउत पर आय से अधिक 313339 रूपये की संपत्ति अधिक अर्जित करने का मामला पकड़ा था़.

श्री राउत इस बीच सेवानिवृत भी हो चुके हैं. जबकि अन्य आरोपियों में सहायक मुरारी मिश्रा की संपत्ति जांच के दौरान कुल आय से 222014 रूपये कम पायी गयी थी़ एसीबी के इस प्रतिवेदन पर सुनवाई के बाद लोकायुक्त ने उपायुक्त को तीन सप्ताह के अंदर अपना कार्रवाई प्रतिवेदन समर्पित करने के निर्देश दिये हैं.

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