उक्त बातें गढ़वा केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने एक प्रेसवार्ता कर कही़ एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि गढ़वा जिले में 353 लाइसेंसी दवा की दुकानें है, जबकि औषधि निरीक्षक के संरक्षण में 100 से अधिक दुकानें गैरकानूनी तरीके से संचालित किये जा रहे हैं. इनमें से 50 दुकानें गढ़वा शहर में संचालित हो रही है़ पदाधिकारियों ने कहा कि डीआइ का कार्यालय गढ़वा है, लेकिन वे डाल्टनगंज में रहते हैं तथा पैसा वसूली के लिए अपने चालक और एक बड़ा बाबू को डीआइ ने रखा हो, जो दवा व्यवसायियों से अवैध वसूली करते है़ं उक्त लोगों ने कहा कि दवा दुकान के लिए नया लाइसेंस बनवाने में 3000 रुपये का चलान सरकार के खाते में जमा करना होता है. लेकिन डीआइ द्वारा 30 हजार रुपये वसूले जाते है़ं.
उक्त लोगों ने कहा कि 1940 का काला कानून फार्मासिस्ट की बाध्यता उनपर थोपी जा रही है और जिन दुकानों में फर्मासिस्ट नहीं है, उनसे 20-20 हजार रुपये मांगा जा रहा है़ पदाधिकारियों ने कहा कि उनकी मांग है कि आरएलए अपने कार्यालय डाल्टनगंज तथा डीआइ गढ़वा में नियमित रूप से रहे और दुकानों की जांच करे़ दुकानदारों से अवैध वसूली बंद हो और उन्हें प्रताड़ित नहीं किया जाय़े उनकी मांगे नहीं मानी गयी और अधिकारियों में सुधार नहीं हुआ तो एसोसिएशन आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा़ प्रेसवार्ता में एसोसिएशन के अध्यक्ष अद्याशंकर पांडेय, सचिव नंद किशोर श्रीवास्तव, कोषाध्यक्ष संतोष दुबे, संगठन मंत्री अशोक कुमार गुप्ता, दीपक तिवारी,विवेक केसरी, सुरेंद्र प्रसाद कश्यप, मिथिलेश कुमार सिन्हा,वेंकेटेश्वर नारायण अन्य लोग उपस्थित थे़.
