उनकी शहादत काबिले तारीफ थी. इमाम हुसैन ने अपनी शहादत के माध्यम से पूरी दुनिया को यह संदेश दिया है कि किसी भी परिस्थिति में इंसान को जुल्म सहन नहीं करना चाहिए. बल्कि इसका प्रतिकार डटकर करना चाहिए. इमाम हुसैन ने अन्याय, अत्याचार, आतंकवाद, शोषण व दमन के खिलाफत डटकर किया था. मौके पर मुहर्रम इंतजामिया कमेटी जेनरल के खलीफा हाजी शमीम उर्फ ललन, नूर मोहम्मद तुल्लु, नेयाज अहमद, असगर हुसैन, मो. क्यूम, साबिर अली, रेयाज खान, नन्हे खान, मोबीन अख्तर, शाहनवाज खान, वसीम खान, हाफीज अमजद, शहरेयार,एहतेशाम, मुस्तफा राईन, साजिद खान, कमाल खान, अफजल, इमामुद्दीन खान, जेया खान सहित काफी संख्या में लोग मौजूद थे.
छोटी मसजिद के पास जलसा का आयोजन, ऐसी नमाज कौन पढ़ेगा जहान में
मेदिनीनगर : मंगलवार की रात शहर के छोटी मसजिद के पास एक शाम सोहदाय कर्बला के नाम जलसा का आयोजन किया गया. इसमें कई लोगों ने इमाम हुसैन की शहादत का वाक्या पेश किया. प्रसिद्ध शायर मिर्जा खलील बेग ताहिर ने इमाम हुसैन की शान में कलाम पेश करते हुए कहा कि ऐसी नमाज कौन […]

मेदिनीनगर : मंगलवार की रात शहर के छोटी मसजिद के पास एक शाम सोहदाय कर्बला के नाम जलसा का आयोजन किया गया. इसमें कई लोगों ने इमाम हुसैन की शहादत का वाक्या पेश किया. प्रसिद्ध शायर मिर्जा खलील बेग ताहिर ने इमाम हुसैन की शान में कलाम पेश करते हुए कहा कि ऐसी नमाज कौन पढ़ेगा जहान में,सजदा किया तो सर ना उठाया हुसैन ने.
इसके अलावा शायर नसीम रेयाजी व मोहम्मद जहिरुद्दीन ने भी इमाम हुसैन की शान में कलाम पेश किया. छोटी मसजिद के इमाम व खतिब जुबैर साहब व मदीना मसजिद के इमाम सैयद रजीउद्दीन साहब ने कहा कि इमाम हुसैन ने यजिदियों के सामने अपना सर नहीं झुकाया. बल्कि उन आततायियों के साथ जंग करते हुए पूरे कुनबे के साथ शहीद हो गये.