East Singhbhum News : पेसा कानून में कई त्रुटियां, संशोधन जरूरी

पेसा दरबार में आदिवासी स्वशासन व्यवस्था पर चर्चा हुई, बहादुर सोरेन ने कहा

गालूडीह

. गालूडीह बराज के पास शुक्रवार को माझी परगना महाल के प्रखंड अध्यक्ष सह देश विचार सचिव बहादुर सोरेन की अध्यक्षता में पेसा दरबार आयोजित हुआ. यहां आदिवासी स्वशासन व्यवस्था पर खुली चर्चा हुई. लोगों ने पेसा कानून पर अपनी राय रखी. पेसा दरबार का संचालन महाल के सुधीर कुमार सोरेन ने किया. पेसा दरबार में क्षेत्र के 40 से अधिक माझी बाबा (ग्राम प्रधान) शामिल हुए. यहां पेसा कानून को लेकर माझी परगना, डोकलो सहर, मानकी-मुंडा, पड़हा राजा और भूमिज आदिवासियों की संयुक्त भागीदारी में पेसा कानून को लेकर खुली चर्चा की.

महाल के बहादुर सोरेन ने कहा कि झारखंड सरकार के पेसा कानून में कई त्रुटियां हैं. इसमें संशोधन की आवश्यकता है. उन्होंने केंद्र सरकार के पेसा कानून के अनुरूप झारखंड में भी पेसा कानून की मांग की. झारखंड सरकार संविधान के भाग 9 का उल्लंघन कर रही है, जो उचित नहीं है. पेसा कानून में रूढ़ीजन विधि, सामाजिक, संस्कृति, धार्मिक पद्धतियों और सामुदायिक संपदाओं की परंपरागत प्रबंधन पद्धतियों के अनुरूप होना चाहिए. मौके पर ग्राम प्रधान हरीश चंद्र भूमिज, सिधेश्वर भूमिज, सुनील किस्कू, रामधन बास्के, करण मुर्मू, छूटु सिंह, मोहन मुर्मू, विश्वनाथ सोरेन, मार्शल मुर्मू, अर्जुन सरदार, जयपाल सिंह सरदार, रायसेन मुर्मू, सुनाराम सोरेन, मानिक सरदार, बीरबल सोरेन, शंकर टुडू, अंपा मार्डी, डुमनी मुर्मू, फकीर हेंब्रम, फागू सोरेन, मानसिंह हेंब्रम आदि ग्रामीण उपस्थित थे.

पेसा दरबार में झारखंड पेसा नियमावली को लेकर विचार हुआ. स्वशासन व्यवस्था पर चर्चा कर कई निर्णय लिये गये. आगे की रणनीति बनायी गयी. पेसा कानून को लेकर आदिवासी समाज में एकजुटता को लेकर बल दिया दिया.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By ATUL PATHAK

ATUL PATHAK is a contributor at Prabhat Khabar.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >