बहरागोड़ा. बहरागोड़ा प्रखंड क्षेत्र के किसानों के लिए मंगलवार को हुई 2.2 मिलीमीटर की हल्की बारिश किसी वरदान से कम साबित नहीं हुई. सुवर्णरेखा नदी के तट पर स्थित मोहुलडांगरी गांव में बड़े पैमाने पर हो रही मूंगफली की खेती के लिए यह आंशिक बारिश संजीवनी बनकर आयी है. लगभग 265 बीघा जमीन पर फैली मूंगफली की फसल यहां के किसानों की आय का मुख्य स्रोत है. यहां की भौगोलिक स्थिति खेती के लिए बेहद अनुकूल है. यहां की मिट्टी भुरभुरी है, जो मूंगफली के दानों के विकास के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है. इस खेती में न तो अधिक सिंचाई की जरूरत होती है और न ही भारी खाद की. बीज लगाने के बाद एक आंशिक बारिश ही बेहतर उत्पादन के लिए काफी होती है.
बाजार में 65 रुपये प्रतिकिलो तक का भाव
यहां उत्पादित मूंगफली की गुणवत्ता इतनी अच्छी है कि इसकी मांग स्थानीय स्तर के साथ-साथ पश्चिम बंगाल और ओडिशा में भी काफी अधिक है. वर्तमान में यहां की मूंगफली 60 से 65 रुपये प्रति किलो की दर से बेची जा रही है. किसानों का अनुमान है कि यदि अगले एक महीने तक मौसम अनुकूल रहा, तो प्रति बीघा 8 से 9 क्विंटल तक उत्पादन होगा, जिससे उन्हें मोटा मुनाफा होने की उम्मीद है. मूंगफली की खेती केवल किसानों को ही नहीं, बल्कि स्थानीय मजदूरों को भी आर्थिक संबल प्रदान करती है.
प्रति बीघा में 8 से 9 क्विंटल मूंगफली का होता है उत्पादन
मोहुलडांगरी के किसानों का कहना है कि मूंगफली का उत्पादन अब से लगभग एक महीने बाद शुरू हो जायेगा. यदि इस बीच भारी बारिश नहीं हुई और शुष्क मौसम बना रहा, तो इस साल पैदावार पिछले रिकॉर्ड तोड़ सकती है. किसानों ने बताया कि मौसम और वातावरण अनुकूल रहा तो इस बार मूंगफली की खेती में काफी फायदा होगा. लगभग एक महीना बाद मूंगफली का उत्पादन होना शुरू हो जायेगा अगर इसी बीच बारिश नहीं हुई तो प्रति बीघा 8 से 9 क्विंटल मूंगफली का पैदावार होगी.