East Singhbhum News : सीमित संसाधनों में गरीब मरीजों के लिए संजावनी बनी एनआइसीयू

16 वर्षों से दे रहा जीवनदान, विशेषज्ञ डॉक्टरों और वेंटिलेटर की अब भी दरकार

घाटशिला. घाटशिला अनुमंडल अस्पताल में संचालित नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआइसीयू) और बर्न केयर यूनिट क्षेत्र के गरीब व मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए संजीवनी साबित हो रही हैं. वर्ष 2009 में स्थापित यूनिट 16 वर्षों से लगातार सेवाएं दे रही है. हर महीने औसतन 50 से 55 नवजातों (जन्म से कमजोर, समय से पहले जन्म व वजन बेहद कम) का इलाज होता है.

पूरी तरह नि:शुल्क है सुविधा:

चिकित्सा प्रभारी डॉ. आरएन सोरेन ने बताया कि यहां सेवा पूरी तरह नि:शुल्क है. इलाज के साथ नवजात की मां के लिए भोजन की मुफ्त व्यवस्था की जाती है. यहां घाटशिला समेत बहरागोड़ा, चाकुलिया, मुसाबनी और डुमरिया जैसे सुदूरवर्ती प्रखंडों से मरीज पहुंचते हैं.

संसाधनों और विशेषज्ञों की कमी बनी चुनौती :

यह यूनिट बेहतर परिणाम दे रही है, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी एक बड़ी बाधा है. अस्पताल में फिलहाल केवल दो चिकित्सक कार्यरत हैं. यहां स्त्री रोग और शिशु रोग विशेषज्ञों के साथ-साथ वेंटिलेटर की सख्त आवश्यकता महसूस की जा रही है. सुविधाओं के अभाव में कई बार गंभीर रूप से बीमार शिशुओं को जमशेदपुर रेफर करना पड़ता है. इसके बावजूद, बेहतर साफ-सफाई और एएनएम की मुस्तैदी के कारण यह यूनिट क्षेत्र का सबसे भरोसेमंद केंद्र बनी हुई है.

वर्ष 2025 में 525 नवजात भर्ती 
हुए, 524 स्वस्थ होकर लौटे

अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में कुल 525 नवजात शिशुओं को भर्ती किया गया था, जिनमें से 524 शिशु पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौटे. वहीं, इस साल जनवरी और फरवरी माह में अब तक 75 नवजातों का सफल उपचार किया जा चुका है. वर्तमान में यूनिट में एक दर्जन बेबी वार्मर उपलब्ध हैं.

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By ATUL PATHAK

ATUL PATHAK is a contributor at Prabhat Khabar.

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