घाटशिला.
जेएलकेएम नेता रामदास मुर्मू के नेतृत्व में सोमवार को जेएलकेएम के पदाधिकारी व विस्थापित परिवारों ने एचसीएल गेट के समीप धरना दिया. बताया गया कि सुरदा माइंस सब फॉर में करीब 50 वर्षों से कंपनी अवैध रूप से लोगों की जमीन का अधिग्रहण कर माइनिंग कर रही है. प्रभावित परिवारों को आज तक न मुआवजा मिला, न कंपनी में नौकरी मिली. उन्होंने मांग रखी कि उन परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाये. उन परिवारों में से एक सदस्य को स्थायी नौकरी दी जाये, ताकि अपनी रोजी-रोटी चला सकें. विशेष रूप से उन आश्रित परिवारों की चिंता है, जिनमें स्व चंद्र मोहन पात्र व शिवदास मान्ना शामिल हैं. ये लोग कंपनी में 15 वर्षों से अधिक सेवा देने के बाद अचानक मृत्युवरण को प्राप्त हुए, लेकिन उनके परिजनों को कंपनी की तरफ से डेथ बेनिफिट तक नहीं दिया गया. हम मांग करते हैं कि उन्हें उचित डेथ बेनिफिट व अन्य सभी सुविधाएं प्रदान किया जाये. दोनों पक्षों ने पूरी मांगों से अवगत होते हुए अगली वार्ता की तिथि 22 सितंबर तय की है.विस्थापित परिवारों के हक की रक्षा के लिए संघर्ष
रामदास मुर्मू ने स्पष्ट किया कि वार्ता के बाद आगे की रणनीति बनायेंगे. हमारी लड़ाई केवल उचित मुआवजा और रोजगार तक सीमित नहीं है. विस्थापित परिवारों के हक की रक्षा का संघर्ष है. मौके पर पोटका पूर्व प्रत्याशी भागीरथी हांसदा, दीपक पातर, चीतों महतो, दुलार महतो, कन्हाई दास समेत विस्थापित परिवारों के दर्जनों सदस्य शामिल थे. मौके पर रामदास मुर्मू ने कहा कि कंपनी द्वारा वार्ता के लिए बुलाया गया था, जिसमें कंपनी के एचआर कमलेश कुमार व अर्जुन लोहरा उपस्थित थे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
