सूखना पहाड़ जंगली हाथियों का अड्डा, पानी के लिए भटक रहे
पिछले वर्ष प्यास से एक हाथी का बच्चा मर गया था
भूतियाकोचा, लोवागोड़ा,कालाझोर समेत कई गांव के ग्रामीण भी परेशानी में
गालूडीह : सूखना पहाड़ की तलहटी पर स्थित बांदोरचुआ झरना सूखने से वन्य प्राणी संकट में हैं. पिछले साल भी जंगलों और पहाड़ों के जल स्रोत सूखने से चेकाम पहाड़ पर प्यास से एक जंगली हाथी का बच्चा मर गया था. इस बार भी पहाड़ों के जल स्रोत सूख गये हैं. बांदोरचुआ पहाड़ी झरना सूखने से इससे सटे भूतियाकोचा, लावोगोड़ा, कालाझोर समेत कई गांवों के लोग परेशान हैं.
सुखना पहाड़ में लकड़ी, पत्ता, दतवन लाने जाने वाले ग्रामीण भी परेशान हैं. लोवागोड़ा के दुलाल हांसदा और संजित हांसदा ने बताया कि जंगल आने वाले ग्रामीण बांदोरचुआ से अपनी प्यास बुझाते थे. झरना सूखने से सभी परेशान हैं. इस झरना से जंगली हाथियों की प्यास बुझती थी. सूखना पहाड़ जंगली हाथियों का मुख्य अड्डा है. जल स्रोत और झरना सूखने से हाथियों का झुंड इधर-उधर पानी की तलाश में भटक रहा है.
झरना का उदगम स्थल सूखा, पहाड़ी नाले सूख गये: बांदोरचुआ झरना का उदगम स्थल सूख गया है. एक ग्रामीण साल पत्ता का दोना बनाकर झरना से पानी निकालने का प्रयास कर रहा था. ग्रामीणों ने बताया कि इसी झरना का पानी बह कर पहाड़ी नाला में जाता था.
झरना सूखने से पहाड़ी नाला भी सूख गया है. जाड़ा और बरसात में पहाड़ी नाला में तेज बहाव रहता है. इस बार मार्च में नाला और झरना सूख गया.
