गुड़ाझोर ने नक्सलवाद में सिर्फ खोया, पाया कुछ नहीं

60 युवा रोजगार के लिए कर गये पलायन घाटशिला : बाघुड़िया पंचायत के सुखना पहाड़ और निशीझरना की तलहटी में बसा करीब 300 परिवारों का भूमिज बहुल गुड़ाझोर गांव नक्सलवाद की आग में सिर्फ खोया, पाया कुछ नहीं. 2006 से लगातार नक्सली घटनाएं और पुलिसिया दबाव के बाद इस गांव के अधिकांश युवा गांव-घर छोड़ […]

60 युवा रोजगार के लिए कर गये पलायन

घाटशिला : बाघुड़िया पंचायत के सुखना पहाड़ और निशीझरना की तलहटी में बसा करीब 300 परिवारों का भूमिज बहुल गुड़ाझोर गांव नक्सलवाद की आग में सिर्फ खोया, पाया कुछ नहीं. 2006 से लगातार नक्सली घटनाएं और पुलिसिया दबाव के बाद इस गांव के अधिकांश युवा गांव-घर छोड़ कर रोजगार के अन्य प्रदेशों में पलायन
करने लगे. पलायन का सिलसिला वर्ष 2006 से नक्सली धमक के बाद ज्यादा शुरू हुआ और अब तक जारी है. वर्तमान में इस गांव के 60 युवा तमिलनाडु समेत अन्य कई प्रदेशों में रोजगार के लिए पलायन कर गये हैं. ग्रामीण कहते हैं नक्सली धमकबढ़ने के बाद शाम ढलते ही इस गांव में नक्सली बैठक करते थे. नक्सली का आना जाना लगा रहा था. तब पुलिसिया कार्रवाई भी बढ़ी.
किसने किया है पलायन: इस गांव के निर्मल सिंह, छुटू लाल सिंह, देवेन सिंह, उत्तम सिंह, कृष्णा सिंह, बासुरी सिंह, जोहल सिंह, सुकरा सिंह, मंगल सिंह, लालटू सिंह, कुशल सिंह, जीवन सिंह, राम मोहन सिंह, मुकुंद सिंह समेत कई युवा शामिल हैं, जो वर्त्तमान में तमिलनाडु में रोजगार कर रहे हैं.
गांव का प्रत्येक परिवार लकड़हारा: गुड़ाझोर गांव में पांच टोले हैं. इस गांव में करीब 300 भूमिज परिवार निवास करते हैं. प्रत्येक परिवार लकड़ हारा हैं. लकड़ी बेच कर ही परिवार चलता हैं. दिन में महिला-पुरूष लकड़ी लाने जंगल जाते हैं और शाम में लौटते हैं. दूसरे दिन लकड़ी बेच कर फिर जंगल जाते हैं. यह उनकी दिनचर्या है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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