नक्सलियों की मनमानी से ग्रामीणों का हुआ मोह भंग

घाटशिला : जिन चंद उदंड नक्सलियों को नक्सली संगठन सीपीआइ (माओवादी) संगठन के शीर्ष नेतृत्व ने संगठन से बाहर का रास्ता दिखाया, उनके नेतृत्व में कई बर्बर कार्रवाई की गयी. कई निर्दोष ग्रामीणों की हत्या पुलिस की मुखबिरी करने के आरोप में की गयी. कई घरों को फूंका गया. सामान नष्ट किये गये. वृद्धों को […]

घाटशिला : जिन चंद उदंड नक्सलियों को नक्सली संगठन सीपीआइ (माओवादी) संगठन के शीर्ष नेतृत्व ने संगठन से बाहर का रास्ता दिखाया, उनके नेतृत्व में कई बर्बर कार्रवाई की गयी. कई निर्दोष ग्रामीणों की हत्या पुलिस की मुखबिरी करने के आरोप में की गयी. कई घरों को फूंका गया. सामान नष्ट किये गये. वृद्धों को भी पीटा गया. उदंड नक्सलियों द्वारा की गयी इन घटनाओं से ग्रामीणों का संगठन से मोह भंग हुआ.

घाटशिला के दीघा-चापड़ी में छह-सात सितंबर 2007 की शाम नक्सलियों के एक दल ने हमला किया और जमकर उत्पात मचाया. पुलिस की मुखबिरी करने के आरोप में बादल प्रमानिक और निमाई मुर्मू नामक दो ग्रामीणों की नृशंस हत्या कर दी. इतना ही नहीं नक्सलियों ने बादल प्रमानिक के घर में तोड़फोड़ की और आग के हवाले कर दिया. कई अन्य ग्रामीणों के घरों में भी तोड़फोड़ की. नक्सलियों की इस बर्बर कार्रवाई को जिसने भी देखा, का मन दहल गया.
इसी प्रखंड के डाइनमारी में 30 मार्च 2010 को बिदू बानरा की नृशंस हत्या की. उनके घर को आग हवाले कर दिया. घर के सामानों को लूट कर ले गये. नक्सलियों ने और दो-तीन घरों को आग के हवाले किया. घर के सामानों को यह कह कर लूट लिया कि कुर्की की गयी है. इन घटनाओं से ग्रामीणों के बीच संगठन ने अपनी शाख खो दी. यह अलग बात है कि नक्सलियों के भय से ग्रामीणों ने चुप्पी साधे रखी.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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