गुड़ाबांदा : 25 लाख का इनामी नक्सली कान्हू राम मुंडा और उसके दस्ते के छह सदस्यों का सरेंडर के बाद पुलिस प्रशासन ने दावा किया है कि प्रखंड से नक्सलवाद का सफाया हो गया. अब इस पिछड़े प्रखंड का विकास करना प्रशासन के लिए चुनौती होगा. नक्सलवाद की आग में जल रहे इस प्रखंड का सही मायने में विकास नहीं हुआ है. जन प्रतिनिधियों और नौकरशाहों की उपेक्षा से यहां के ग्रामीण आज भी विकास की बांट जोह रहे हैं. हालांकि कई प्रमुख सड़कें बनी हैं
गुड़ाबांदा प्रखंड का विकास प्रशासन की अग्नि परीक्षा
गुड़ाबांदा : 25 लाख का इनामी नक्सली कान्हू राम मुंडा और उसके दस्ते के छह सदस्यों का सरेंडर के बाद पुलिस प्रशासन ने दावा किया है कि प्रखंड से नक्सलवाद का सफाया हो गया. अब इस पिछड़े प्रखंड का विकास करना प्रशासन के लिए चुनौती होगा. नक्सलवाद की आग में जल रहे इस प्रखंड का […]

ओड़िशा सीमा से सटा यह रत्नगर्भा प्रखंड आठ पंचायतों (बहरागोड़ा की चार और धालभूमगढ़ की चार) को मिला कर बना है. यह ऐसा प्रखंड है, जिसमें दो विधायक हैं. उत्तर और पूर्व में सुवर्णरेखा नदी, दक्षिण में कड़िया नाला और दक्षिण में बीहड़ पहाड़ों से घिरा यह प्रखंड कई मायनों में विकास से वंचित है. इसका एक कारण नक्सलवाद भी माना जाता है. नक्सलवाद के कारण ही यह प्रखंड पन्ना का अंतरराष्ट्रीय और पत्थरों का अतंरप्रांतीय बाजार बन गया.
सिर्फ बीडीओ का ही पदस्थापन
विडंबना है कि प्रखंड गठन के 10 साल में सिर्फ एक बीडीओ का पदस्थापन हुआ है. ऐसे में यहां की आधी जनता बहरागोड़ा और आधी धालभूमगढ़ के भरोसे है. अधिकांश विभाग के पदाधिकारी प्रभार में हैं. सीओ, एमओ, सीडीपीओ समेत अन्य कई पदाधिकारियों का पदस्थापन नहीं हुआ है.
कस्तूरबा गांधी विद्यालय नहीं
महिला शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार राज्य के लगभग सभी प्रखंडों में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय बनाया. इससे महिला शिक्षा को नया आयाम मिला. मगर यह प्रखंड इस स्कूल से वंचित रहा.
मुख्यमंत्री दाल-भात योजना नहीं: गरीबों को सस्ते दाम पर भोजन उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने मुख्यमंत्री दाल-भात योजना शुरू की. लगभग सभी प्रखडों में यह योजना शुरू हुई. मगर यह प्रखंड इस जन कल्याणकारी योजना से वंचित रहा.
प्लस टू विद्यालय नहीं: शिक्षा के विकास के लिए सरकार ने थोक भाव से प्लस टू विद्यालय की स्थापना की. इसके लिए आलीशान भवन बनवाये गये. मगर यह प्रखंड प्लस टू विद्यालय से भी वंचित है. मैट्रिक पास करने के बाद यहां के छात्र-छात्राओं को बहरागोड़ा और घाटशिला कॉलेज जाना पड़ता है.
मैट्रिक परीक्षा का सेंटर नहीं: यह ऐसा प्रखंड है, जहां किसी भी विद्यालय में मैट्रिक के लिए परीक्षा केंद्र नहीं बनाया जाता है. यहां के मैट्रिक परीक्षा देने वाले छात्र-छात्राओं को दूसरे प्रखंड में जाना पड़ता है.