घाटशिला : घाटशिला एक प्रमुख पर्यटक स्थल है. तीन दिशाओं से पहाड़ों तथा साल के वनोंं से घिरा प्राकृतिक छटा से भरपूर बुरूडीह डैम यहां का स्वर्ग है. यहां के प्राकृतिक सौंदर्य न सिर्फ झारखंड के वरन अन्य कई राज्यों के पर्यटकों को अपनी आकर्षित करता है. मगर विडंबना है कि इस डैम का रख-रखाव करने वाला कोई नहीं है. स्वच्छ भारत अभियान के बीच इस डैम के आसपास थर्मोकोल के जूठे प्लेट बिखरे पड़े हैं. प्लेट हवा से उड़ कर डैम के पानी में गिर रहे हैं. विगत 25 दिसंबर से ही यहां पिकनिक मनाने का दौर चल रहा है और लोग थर्मोकोल के जूठे प्लेट डैम पर फेंक रहे हैं. देश में स्वच्छता अभियान चल रहा है.
बुरूडीह डैम पर बिखरे पड़े हैं थर्मोकोल के जूठे
घाटशिला : घाटशिला एक प्रमुख पर्यटक स्थल है. तीन दिशाओं से पहाड़ों तथा साल के वनोंं से घिरा प्राकृतिक छटा से भरपूर बुरूडीह डैम यहां का स्वर्ग है. यहां के प्राकृतिक सौंदर्य न सिर्फ झारखंड के वरन अन्य कई राज्यों के पर्यटकों को अपनी आकर्षित करता है. मगर विडंबना है कि इस डैम का रख-रखाव […]

घाटशिला में भी सरकारी पदाधिकारी अपने हाथों में झाड़ू लेकर स्वच्छता का संदेश दे रहे हैं. मगर बुरूडीह डैम के पास थर्मोकोल के जूठन प्लेट बिखरे पड़े हैं. इन्हें देख पश्चिम बंगाल से यहां आने वाले पर्यटकों के मुंह से अनायास ही निकल पड़ता है. छी…छी.. स्वर्गो टी के कि नोगरा करे रेखेछे (छी..छी… स्वर्ग को कितना गंदा बना रखा है). दरअसल, घाटशिला के इस हृदय स्थल की साफ सफाई के प्रति प्रशासन का ध्यान नहीं है. अलबत्ता, कई प्रशासनिक पदाधिकारियों ने भी नव वर्ष के अवसर पर इस डैम पर ही पिकनिक का लुफ्त उठाया और डांस भी किया.
डैम पर शौचालय नहीं, खुले में शौच है मजबूरी
स्वच्छता अभियान के मद्देनजर सरकार शौचालय निर्माण पर खास जोर दे रही है. कई योजनाएं बन रही हैं. बेटी देंगे उस घर में शौचालय होगा जिस घर में, का नारा बुलंद किया जा रहा है. मगर हैरानी इस बात की है कि इस डैम तथा इसके आसपास कोई शौचालय नहीं है. जबकि पर्यटन के मौसम में यहां अनेक पर्यटक आते हैं. प्रशासन ने इस अहम तथ्य को नजर अंदाज किया. नतीजतन खुले में शौच करना यहां आने वाले पुरुष और महिला पर्यटकों की मजबूरी है. डैम से करीब 750 मीटर दूर बने कैफेटेरिया में निर्मित शौचालय का पानी के अभाव में व्यवहार नहीं किया जाता है.