अंतरराष्ट्रीय होगी धालभूम हवाई पट्टी
धालभूमगढ़ : सांसद विद्युत वरण महतो ने कहा कि धालभूमगढ़ की परित्यक्त हवाई पट्टी को अंतरराष्ट्रीय हवाई पट्टी के रूप में विकसित करने की योजना है. हवाई पट्टी को विकसित करने से राज्य सरकार को भूमि अधिग्रहण नहीं करना पड़ेगा. हवाई पट्टी शून्य किलोमीटर से एनएच 33 और रेलवे स्टेशन आने-जाने की सुविधा है. इस मसले पर केंद्रीय उड्डयन मंत्री और मुख्यमंत्री से बातचीत हुई है. धालभूमगढ़ हवाई पट्टी अंतरराष्ट्रीय हवाई पट्टी बनने से कोल्हान के लिए विशेष तोहफा होगा.
तत्कालीन इस्ट इंडिया कंपनी ने द्वितीय विश्व युद्ध 1939-42 के दौरान सामरिक हवाई पट्टी बनायी थी. लगभग 900 एकड़ भूमि पर घने साल जंगलों के बीच हवाई पट्टी बनायी गयी थी. विस्तृत रन वे और हवाई पट्टी आज भी है.
इस पर एक साथ कई लड़ाकू विमान उतरते और उड़ते थे. रूआशोल, दूधचुआ, कोकपाड़ा-नरसिंहगढ़, चारचक्का, घासीडीह, बुरूडीह, देवशोल, जड़शोल गांव में हवाई पट्टी की भूमि थी. चीन और पाकिस्तान युद्ध के दौरान हवाई पट्टी का उपयोग होते यहां के बुजुर्गों ने देखा है. सर्वे सेटलमेंट के समय विभाग की ओर से सामरिक हवाई पट्टी की दावेदारी नहीं करने से घने जंगल वन विभाग के नाम और कई रैयतदारों के नाम दर्ज हैं. रन वे और मूल हवाई पट्टी की 413 एकड़ भूमि हवाई पट्टी के नाम है.
