फैलिन ने छोड़ा बर्बादियों का मंजर, लोग अब भी कर रहे मदद का इंतजार
बहरागोड़ा : फैलिन के प्रभाव से हुई वर्षा, आंधी और सुवर्णरेखा नदी के उफान ने बहरागोड़ा विस के कई गांवों में तबाही मचायी, न केवल धान की, वरन सब्जी की फसल भी तबाह हुई. किसानों की कमर टूट गयी.
कई परिवार बेघर हुए. दर्जनों परिवारों ने विभिन्न स्कूलों में शरण लिया, मगर यहां के प्रभावितों का दर्द किसी ने नहीं जाना. सुधि लेने कोई नहीं गया. एक मुट्ठी चावल या फिर सिर छिपाने के लिए एक तिरपाल भी नसीब नहीं हुआ. जन प्रतिनिधि, नौकरशाह या फिर किसी राजनीतिक दल का नेता इनका हाल जानने नहीं गया.
अहम सवाल है कि आखिर यहां के फैलिन प्रभावितों की उपेक्षा क्यों हुई? यह सवाल हर किसी प्रभावित के जेहन में तैर रहा है. इस उपेक्षा से प्रभावित परेशान और हैरान है. मदद के लिए इन्हें अपने जन प्रतिनिधियों का इंतजार है. वैसे तो मुसाबनी और डुमरिया में भी फैलिन ने कहर ढाया था, परंतु वहां के प्रभावितों की मदद में प्रशासन आगे आया. शिविरों में राहत सामग्री दी गयी.
प्रभावित परिवारों को तिरपाल दिया गया. विभिन्न दलों के नेता और जन प्रतिनिधियों ने क्षेत्र का दौरा कर प्रभावितों का हाल जाना, मगर विडंबना है कि बहरागोड़ा के प्रभावितों की किसी ने सुधि नहीं ली. किसानों का सर्वाधिक नुकसान बहरागोड़ा में ही हुआ है. खास कर यहां के सुवर्णरेखा नदी के किनारे बसे गांवों में नदी की बाढ़ ने तबाही मचायी. सैकड़ों एकड़ खेत में खड़ी धान तथा सब्जी की फसल बर्बाद हो गयी.
बहुलिया पंचायत समेत अन्य पंचायतों में दर्जनों घर क्षतिग्रस्त हुए. कई परिवार के सिर से छत छिन गयी. लोग दाने–दाने को मोहताज हो गये. अपने सगे संबंधियों के यहां पलायन करने लगे. बर्नीपाल के मछुआरे दो दिनों तक गांव छोड़ कर रघुनाथपुर स्कूल भवन में रहे. बहुलिया के गिटी टोला के लोगों का चूल्हा बंद हो गया, मगर इनकी सुधि लेने कोई नहीं पहुंचा.
कई जगहों पर लोगों ने नाव का सहारा लिया. सबसे बड़ी बात है कि किसानों को लाखों का नुकसान हुआ, मगर इन आहत किसानों का दर्द किसी नहीं समझा. फैलिन का प्रभाव गये तीन दिन हो गये, मगर यहां के प्रभावितों को किसी की मदद का इंतजार है. इस मसले पर घाटशिला के एसडीओ अमित कुमार ने कहा कि जल्द ही यहां के प्रभावितों के बीच तिरपाल का वितरण किया जायेगा.
