पूर्व मंत्री का राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार
पोटका : अविभाजित बिहार व झारखंड के पूर्व मंत्री सनातन सरदार का गुरुवार को सुबह नौ बजे पोटका प्रखंड के रोलाडीह गांव में निधन हो गया. वे 80 वर्ष के थे. वे कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे. उनका अंतिम संस्कार शाम को गांव के समीप स्थित श्मशान घाट में राजकीय सम्मान के साथ किया गया. उनके पुत्र संतोष सरदार ने मुखाग्नि दी.
कुछ दिनों से बीमार थे
पूर्व मंत्री सनातन सरदार कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे. इस दौरान झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र सिंह के निर्देश पर जिला प्रशासन की ओर से ईलाज के लिए रांची के रिम्स ले जाया गया. यहां उन्हें भरती तो किया गया, पर देखरेख करने वाला कोई नहीं था. ऐसे में उनकी हालत और बिगड़ती गयी.
मंगलवार को रिम्स के चिकित्सकों ने जवाब दे दिया. परिजन बुधवार को उन्हें घर ले कर आ गये. गुरुवार की सुबह नौ बजे उनका निधन हो गया. पूर्व मंत्री सनातन सरदार के परिवार में पत्नी बैशागी सरदार, पुत्री पुष्पमाला सरदार, गेनीवाला सरदार, गंगा सरदार, जमुना, पुत्र कमल लोचन सरदार एवं संतोष सरदार समेत नाती–पोती से भरापूरा परिवार है.
शिक्षक से मंत्री बनने तक का सफर : वर्ष 1934 को पोटका प्रखंड के रोलाडीह गांव में जन्मे सनातन सरदार बीए तक की पढ़ाई की. बीएड कर वह शिक्षक बने और पटमदा क्षेत्र में पढ़ाने लगे. इसके बाद उन्होंने जनता की सेवा के लिए शिक्षक की नौकरी छोड़ कर राजनीति में प्रवेश किया और जन संघ से जुड़े. जनसंघ से 1977 एवं 1980 में वे पोटका से विधायक बने.
इसके बाद वे कांग्रेस से जुड़े और 1985 में फिर कांग्रेस के विधायक पोटका से ही जीत कर बने. इस दौरान बिंदेश्वरी दुबे की सरकार में उन्हें लघु सिंचाई मंत्री बनाया गया. पोटका के तिरिलडीह उच्च विद्यालय व प्रोजेक्ट बालिका उवि पोटका को सरकारी मान्यता उन्हीं की देन है.
