घाटशिला : हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर घाटशिला के होटल आकाशदीप में शुक्रवार की शाम को कार्यपालक दंडाधिकारी ब्रज शंकर प्रसाद सिन्हा की अध्यक्षता में अभियान फॉर ए बेटर टुमॉरो के तत्वावधान में आयोजित ‘कैसे बचेंगी भारतीय मातृ भाषाएं’ पर अंगरेजी साम्राज्यवाद का प्रभाव, कैसे बचेंगी भारतीय मातृ भाषाएं पर हुई परिचर्चा में यह बात सामने आयी कि आदमी खुद को बदलने के लिए अंग्रेजियत को अपनाता जा रहा है.
परिचर्चा में प्रो मित्रेश्वर ने कहा कि न्यायालय को तो हमारी भाषा आती ही नहीं है. वह अंगरेजी छोड़ कर हिंदी का प्रयोग करता ही नहीं है. कुरमाली, खोरटा, मुंडारी, हो भाषा आज लोग भूलते जा रहे हैं.
परिचर्चा में उप प्रमुख जगदीश भकत, वर्षा पांडेय, साधु चरण पाल, साधना पाल, रूपेश दूबे, अनंत लाल महतो, प्रो दिल चंद राम, अशोक गुप्ता, बहादुर सोरेन, राम प्रवेश सिंह, रघुनाथ मुमरू, दीपक टोप्पो ने भाग लिया. परिचर्चा का विषय प्रवेश प्रो इंदल पासवान ने कराया. स्वागत भाषण सुबोध कुमार सिंह ने दिया. संचालन राकेश शर्मा ने किया.
धन्यवाद ज्ञापन विजय कुमार पांडेय ने किया. परिचर्चा से पूर्व साहित्यकार डॉ वंकिम चंद्र महतो के निधन पर शोक व्यक्त की गयी. लोगों ने उनकी आत्मा की शांति के लिए एक मिनट का मौन धारण कर भगवान से प्रार्थना की.
