सरायकेला : चैत्र पर्व छऊ महोत्सव 2015 का आयोजन 5 से13 अप्रैल तक
जमशेदपुर : त्र पर्व छऊ महोत्सव 2015 का आयोजन 5-13 अप्रैल तक सरायकेला के बिरसा मुंडा स्टेडियम में किया जायेगा. इसका उदघाटन सांस्कृतिक कला मंत्री अमर कुमार बाऊरी 11 को करेंगे. इसकी व्यापक तैयारियां की जा रही हैं. आयोजन में इस बार देश के कलाकार शामिल होंगे.
2016 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सरायकेला में छऊ नृत्य समारोह का आयोजन किया जायेगा.इसमें देश के अलावा विदेशों के भी छऊ कलाकार हिस्सा लेंगे. आयोजन को लेकर आयोजित गुरुवार को जमशेदपुर में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए सांस्कृतिक कला के डायरेक्टर अनिल कुमार सिंह, सरायकेला एसडीओ संजीव और राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र खरसावां के निदेशक तपन पटनायक ने कहा कि महोत्सव को लेकर पूरे देश में लोगों का काफी उत्साह देखने को मिल रहा है.
वक्ताओं ने कहा कि नौ दिनों तक चलने वाले इस आयोजन को लेकर सरकार के निर्देश पर कई विभागों ने व्यापक तैयारियां कर ली है. पहले आयोजन सरायकेला जिला प्रशासन द्वारा ही किया जाता था, लेकिन इस बार सरकार के कई विभागों के शामिल होने पर इसका स्वरूप बड़ा होता दिख रहा है. टूरिस्टों को इस महोत्सव से जोड़ने के लिए पैकेज तैयार किया गया है. महोत्सव के दौरान मेला लगाया जायेगा, जिसमें स्थानीय लोगों द्वारा तैयार की गयी कलाकृतियों के अलावा अन्य उत्पादों की प्रदर्शनी-बिक्री की जायेगी. प्रतियोगिता में 60 छऊ दल शामिल होंग़े इनके विजेताओं को समापन समारोह में मुख्यमंत्री के हाथों पुरस्कृत किया जायेगा.
इस मौके पर खादी ग्रामोद्योग बोर्ड तथा झारक्राफ्ट की ओर से स्वदेशी मेला भी लगाया जायेगा़ साथ ही छऊ नृत्य में प्रयोग होनेवाले मुखौटा पर कार्यशाला भी आयोजित होगी़ इसके माध्यम से लोगों को रोजगार से जोड़ने की भी योजना बनायी गयी है. आयोजन स्थल पर रेडक्रॉस की ओर से नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर लगाया जायेगा. इसके अलावा आदिवासियों के रहन-सहन को मॉडल के रुप में प्रदर्शन भी किया जायेगा़
छऊ नृत्य पर बनेगा सिलेबस. तपन पटनायक ने बताया कि कला केंद्र में छऊ नृत्य के नित नये प्रयोग किये जा रहे हैं, जिनका अच्छा और व्यापक रिस्पांस भी मिल रहा है.इन प्रयोगों में इस बात का विशेष ध्यान रखा जा रहा है कि अपनी विरासत कहीं खो नहीं जाये. विरासत को बचाने के साथ-साथ उसे मजबूती भी प्रदान करनी है. नृत्य में महिलाओं को शामिल किया गया है़ जल्द ही कोल्हान विवि से संबंद्धता प्राप्त सिलेबस (5 वर्ष का) को इसमें शामिल किया जाएगा़ इसकी पढ़ाई चांडिल कॉलेज और केएस कॉलेज में होगी. उसके बाद डिप्लोमा डिग्री का भी प्रयास हो रहा है़ इसमें 75 प्रतिशत प्रैक्टिक्ल होगा, जबकि 25 प्रतिशत थ्योरी को शामिल किया गया है.
मेनका ने किया प्रचार रथ को रवाना. बिष्टुपुर मेन रोड में छऊ महोत्सव रथ को पोटका की विधायक मेनका सरदार ने झंडा दिखाकर रवाना किया. इसके पूर्व उन्होंने आयोजन की भरपूर सराहना करते हुए कहा कि कलाकारों को सरकार हर संभव सहयोग कर उन्हें अंतराष्ट्रीय मंच प्रदान करेगी. सरकार की सचिव वंदना डाडेल, निदेशक अनिल कुमार सिंह, एसडीओ संजीव, तपन पटनायक, संदीप शर्मा, राणा डे भी मौजूद थे. रथ रवाना होने के पूर्व राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र खरसावां के कलाकार ने शिव नृत्य की बेहतर प्रस्तुति दी.
परंपरागत पर्व के बारे में जानें. चैत्र माह के द्वितीय सप्ताह से पंचागनुसार धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया जाता है. चैत्र की पच्चीसवीं रात को खरकई नदी तट पर जहां पंच देउली शिव मंदिर स्थापित है, मांजना घाट-नहाने का स्थान से हजारों लोगों द्वारा महारुद्र महादेव, काशी के विश्वनाथ के गगनभेदी उदघोषों के बीच यात्रा घाट एक भोक्ता द्वारा जो रक्तवर्ण परिधारण किये हुए लाल रंग से जिसका मुंह पुता हुआ होगा, ढोल नगाड़ा, महूरी के वाद्य य्संगीत की धुन पर चलेंगे.
छऊ कला पुरुष प्रधान नृत्य था, कला केंद्र ने 1995 में बालिकाओं को नृत्य का प्रशिक्षण देकर एक झारखंड की पहचान देश-विदेश में स्थापित की. छऊ कलाकारों के अथक प्रयास से यह नृत्य किसी परिचय का मोहताज नहीं है. 1938 में यूरोपिये देश के अलावा विदेशों में पहला कला जत्था जिसने भ्रमण किया था वह सरायकेला छऊ का ही था. भारत के महापुरुषों ने इस नृत्य को एक उत्कृष्ट कला की संज्ञा दी है.
यूनेस्को ने छऊ कला को विश्व की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता प्रदान की है. अब तक सरायेकला जैसे छोटे से शहर से छह छऊ कलाकारों को राष्ट्रपति द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है.
