झाटीझरना को बंगाल में मिला दे झारखंड सरकार

विकास से मरहूम ग्रामीणों ने कहा गालूडीह : बंगाल सीमा से सटे घाटशिला प्रखंड एवं गालूडीह थाना क्षेत्र के सबसे बीहड़ पंचायत झाटीझरना विकास से वंचित है. इस पंचायत में करीब दस राजस्व गांव है. पंचायत की आबादी लगभग छह हजार से अधिक है. यहां करीब साढ़े तीन हजार वोटर हैं. यहां के ग्रामीण रहते […]

विकास से मरहूम ग्रामीणों ने कहा
गालूडीह : बंगाल सीमा से सटे घाटशिला प्रखंड एवं गालूडीह थाना क्षेत्र के सबसे बीहड़ पंचायत झाटीझरना विकास से वंचित है. इस पंचायत में करीब दस राजस्व गांव है. पंचायत की आबादी लगभग छह हजार से अधिक है. यहां करीब साढ़े तीन हजार वोटर हैं. यहां के ग्रामीण रहते तो हैं झारखंड में परंतु उनकी जरूरतें बंगाल के भरोसे ही पूरी हो होती है.
इसलिए ग्रामीण काफी दिनों से झाटीझरना को झारखंड से अलग कर बंगाल में मिला देने की मांग कर रहे हैं. झाटीझरना के ग्राम प्रधान नंदलाल सोरेन, भुमरू के माधो मुंडा, टेरापानी के रामकृष्ण महतो आदि ग्रामीण कहते हैं नाम के लिए झारखंड में हैं. काम तो बंगाल के भरोसे ही हम लोगों का हो रहा है. फिर बंगाल में ही क्यों नहीं झाटीझरना को मिला दिया जाता. ग्रामीणों ने कहा कि कहने को इस पंचायत में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं.
परंतु डॉक्टर विहीन. नतीजतन यहां के ग्रामीण बीमार पड़ने पर बंगाल के जुगीडीह, कुचिया या फिर बांदवान इलाज के लिए जाते हैं. यहां के अधिकांश ग्रामीणों का रोजगार का मुख्य साधन बबई रस्सी बनाना और जंगल से लकड़ी काट कर बेचना ही है. बबई रस्सी बनाकर बंगाल के कुचिया, जुगीडीह में बेचते हैं. लकड़ी भी बंगाल में ही बेचते हैं. तब पेट चलता है. रोजगार और इलाज के लिए यहां के लोगों को बंगाल ही जाना पड़ता है. इस पंचायत में आज तक पंचायत मंडप नहीं बन पाया. पंचायत में एक हाइस्कूल पर है. परंतु मास्टर विहीन. सड़कें कई साल से अधूरी है. जल संकट कुछ हद तक दूर हुआ है. बिजली तो हैं, परंतु साल में छह माह ही जलती है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >