गालूडीह : सर्व शिक्षा के तहत स्कूल चलें हम अभियान का पोल खोल रहा है उलदा प्राथमिक विद्यालय. गालूडीह से सटे एनएच 33 किनारे बसा छोटा उलदा गांव में प्राथमिक विद्यालय है, जहां कभी 150 बच्चे अध्ययनरत थे, परंतु आज महज 21 बच्चे यहां नामांकित हैं.
यहां प्रथम से पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई होती है. बच्चों की संख्या कम होने से सभी को एक ही कमरे में बैठा कर पढ़ाया जाता है. इस स्कूल में दो शिक्षक है. वीरेंद्र उपाध्याय और सेंट्रेला कुमारी. शिक्षकों ने बताया कि 2001 से 2005 तक बच्चों की संख्या बेहतर थी. पिछले दो-तीन साल से लगातार बच्चों की संख्या घटती चली गयी. वर्ष 2013 में इस स्कूल में 29 बच्चे थे, परंतु इस वर्ष मात्र 21 है. बच्चों की संख्या घटने के पीछे एक प्रमुख कारण उलदा में हो रहे स्लैंग डंपिंग को भी माना जाता है. इस गांव भूमिज बहुल है.
मजदूर और गरीब तबके से आने वाले बच्चे स्कूल जाने के बजाय स्लैग से लोहा चुनने जाते हैं. शिक्षकों का मानना है कि कई जगह नये स्कूल खुल जाने से भी बच्चों की संख्या घटी है. स्कूल के पोषक क्षेत्र में बच्चे जितने हैं, वे स्कूल आते हैं. एनएच 33 के उस पार बड़ा उलदा के बच्चे एनएच पार कर यहां नहीं आते. सभी बराज मवि में जाते हैं. इससे भी प्रभाव पड़ा है. बच्चों की घटती संख्या से ग्राशिस के अध्यक्ष भूतनाथ हांसदा और प्रबंधन समिति के अध्यक्ष राम जीवन हेंब्रम में चिंतित हैं.
कई माह से स्कूल का चापानल खराब
उलदा प्रावि का चापानल कई माह से खराब है. मध्याह्न् भोजन के लिए दूर से पानी लाया जाता है. बच्चों को पानी पीने के लिए भी परेशानी होती है. शिक्षकों ने बताया कि कई बार मरम्मत करने की मांग की गयी, किसी ने पहल नहीं की.
