दुमका :: दुमका से तैयार एक नवाचारी डैशबोर्ड अब कारोबारियों को अपने ग्राहकों को बेहतर ढंग से समझने और उसी आधार पर कारोबार की रणनीति बनाने में मदद कर सकता है. सेंट जेवियर्स कॉलेज महारो की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ कुसुम कानन मिश्रा द्वारा विकसित ‘उपभोक्ता व्यवहार विश्लेषण डैशबोर्ड’ को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने डिजाइन पेटेंट प्रदान किया है. पेटेंट प्रमाणपत्र के अनुसार इस डिजाइन को डिजाइन संख्या 505944-001 के रूप में पंजीकृत किया गया है. इसे डिजाइन अधिनियम, 2000 के तहत 14-02 श्रेणी में दर्ज किया गया है, जो आंकड़ा प्रसंस्करण उपकरण एवं सहायक यंत्रों से संबंधित है.
ग्राहक को समझने में मदद करेगा डैशबोर्ड
आज बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने के साथ कारोबारियों के लिए यह जानना जरूरी हो गया है कि ग्राहक क्या चाहता है, कौन-सा उत्पाद पसंद कर रहा है, उसकी खरीदारी की आदत कैसी है और समय के साथ उसकी पसंद किस तरह बदल रही है. डॉ कुसुम का डैशबोर्ड इन्हीं सवालों के जवाब उपभोक्ता व्यवहार से जुड़े आंकड़ों के विश्लेषण के माध्यम से तलाशने की सुविधा देता है. इसमें उपलब्ध आंकड़ों को व्यवस्थित तरीके से देखा और उनका विश्लेषण किया जा सकता है. इससे कारोबारी केवल अनुभव या अनुमान के आधार पर निर्णय लेने के बजाय आंकड़ों से मिलने वाले संकेतों को अपनी कारोबारी रणनीति में शामिल कर सकते हैं.
कारोबारियों के लिए क्यों उपयोगी
मांग पहचानें, स्टॉक संभालें : किस उत्पाद की मांग बढ़ रही है और किसकी घट रही है, इसका संकेत मिलने पर कारोबारी उसी अनुसार स्टॉक की योजना बना सकते हैं. इससे जरूरत से ज्यादा माल रखने या मांग के समय उत्पाद उपलब्ध नहीं होने की स्थिति को कम करने में मदद मिल सकती है.
सही ग्राहक तक पहुंचेगा प्रचार : उपभोक्ता की पसंद और व्यवहार के आंकड़ों से कारोबारी अपने संभावित ग्राहक वर्ग को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं. इससे मार्केटिंग और विज्ञापन को अधिक लक्षित बनाने में मदद मिलेगी.
बदलती पसंद पर नजर : ग्राहक की पसंद स्थायी नहीं होती. नियमित आंकड़ा विश्लेषण से बदलते रुझानों की पहचान कर उत्पाद, सेवा और मार्केटिंग रणनीति में समय रहते बदलाव किया जा सकता है.
छोटे कारोबारियों के लिए भी उपयोगी : इसका उपयोग केवल बड़े कॉरपोरेट तक सीमित नहीं है. स्थानीय दुकानदार, रिटेल कारोबारी, सेवा प्रदाता और छोटे उद्यमी भी ग्राहक व्यवहार को समझकर अपने कारोबार को बेहतर ढंग से संचालित कर सकते हैं.
अनुमान नहीं, आंकड़ों से कारोबारी फैसला
मान लीजिए किसी कारोबारी के पास अलग-अलग उत्पादों की बिक्री का आंकड़ा उपलब्ध है. डैशबोर्ड के माध्यम से वह यह समझ सकता है कि किस उत्पाद की मांग किस ग्राहक वर्ग में अधिक है, कौन-से उत्पाद तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं और खरीदारी का रुझान किस दिशा में बदल रहा है. ऐसी जानकारी के आधार पर वह बिक्री, स्टॉक, प्रचार और मार्केटिंग से जुड़े फैसले अधिक प्रभावी ढंग से ले सकता है. ग्राहकों की जरूरत के अनुरूप उत्पाद या सेवा में बदलाव करने में भी इस तरह का विश्लेषण उपयोगी हो सकता है. यानी डेटा को सिर्फ आंकड़ा न मानकर कारोबारी निर्णय का आधार बनाया जा सकता है.
मार्केटिंग खर्च को भी बना सकता है अधिक प्रभावी
विज्ञापन और प्रचार पर खर्च तभी ज्यादा प्रभावी होता है, जब वह सही ग्राहक तक पहुंचे. उपभोक्ता व्यवहार के आंकड़ों के विश्लेषण से संभावित ग्राहकों की प्राथमिकताओं को समझने में मदद मिल सकती है. इससे कारोबारी अपने प्रचार अभियान को अधिक लक्षित कर सकते हैं और ऐसे स्थानों या ग्राहक वर्गों पर अनावश्यक खर्च से बचने की संभावना बढ़ सकती है, जहां उत्पाद की मांग कम है.
शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए भी उपयोगी
डैशबोर्ड का उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है. उपभोक्ता व्यवहार पर शोध करने वाले शोधार्थी, शिक्षक और विद्यार्थी भी इसका उपयोग कर सकते हैं. वास्तविक आंकड़ों के आधार पर ग्राहक व्यवहार का अध्ययन करने से बाजार, उपभोक्ता की प्राथमिकताओं और कारोबारी निर्णय प्रक्रिया को समझने में मदद मिल सकती है.
दुमका से राष्ट्रीय स्तर की पहचान
डॉ कुसुम कानन मिश्रा के इस नवाचार को मिला डिजाइन पेटेंट संताल परगना में शैक्षणिक शोध और नवाचार की संभावनाओं को भी रेखांकित करता है. छोटे शहरों के शिक्षण संस्थानों में तैयार शोध किस तरह बाजार और कारोबार की वास्तविक समस्याओं के समाधान में उपयोगी हो सकता है, यह उपलब्धि इसका उदाहरण है. डॉ मिश्रा ने कहा कि यह उपलब्धि व्यक्तिगत उपलब्धि से आगे संताल परगना में शोध और नवाचार की क्षमता का संकेत है. इससे शिक्षक, विद्यार्थी और युवा नये विचारों पर काम करने के लिए प्रेरित होंगे. उपभोक्ता को जितना बेहतर समझा जायेगा, कारोबारी फैसला उतना ही सटीक हो सकता है. दुमका में विकसित यह डैशबोर्ड इसी सोच को तकनीक और आंकड़ों से जोड़ता है और भविष्य में छोटे-बड़े कारोबारियों के लिए डेटा आधारित निर्णय का उपयोगी साधन बन सकता है.
