कोल टेस्टिंग पर माले का एक्शन, 6 सितंबर को गांव-गांव पहुंचेगी जांच टीम

भाकपा-माले की एक जांच टीम 6 सितंबर को शिकारीपाड़ा प्रखंड के विभिन्न गांवों का दौरा करेगी. यह टीम कथित कोल टेस्टिंग कार्य की पड़ताल करेगी और ग्रामीणों से सीधी बात करेगी.

संवाददाता, दुमका. शिकारीपाड़ा प्रखंड में शुक्रवार को भाकपा-माले की प्रखंड स्तरीय बैठक आयोजित की गयी. अध्यक्षता संन्यासी हेम्ब्रम ने की, जबकि संचालन प्रखंड सचिव सुभाषचंद्र मंडल ने किया. बैठक में पूर्व में आयोजित चेतावनी रैली की समीक्षा के साथ आगामी आंदोलन की रणनीति पर चर्चा की गयी. भाकपा-माले के जिला संयोजक सह राज्य कमेटी सदस्य भुण्डा बास्की मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे.

कथित कोल टेस्टिंग कार्य की जांच करेगी पार्टी की टीम

बैठक को संबोधित करते हुए भुण्डा बास्की ने बताया कि दो सितंबर 2026 को रांची में भाकपा-माले राज्य स्थायी कमेटी की बैठक हुई थी. बैठक में लिये गये निर्णय के अनुसार शिकारीपाड़ा प्रखंड के तेलांगापाड़ा, बादलपाड़ा, कल्याणपुर, खड़ीजोल, खरीपहाड़, अमराकुंडा, मासतारा, सरायबिंधा, रसनाला, लूटियापहाड़ और फूलशहरी सहित अन्य गांवों में कथित रूप से कराये जा रहे कोल टेस्टिंग कार्य की जांच की जायेगी.

उन्होंने कहा कि इसके लिए पार्टी की जांच टीम छह सितंबर को दुमका पहुंचेगी और संबंधित क्षेत्रों का दौरा करेगी.

ग्रामीणों और रैयतों से करेगी बातचीत

भुण्डा बास्की के अनुसार, जांच टीम में केंद्रीय कमेटी सदस्य सह पोलित ब्यूरो सदस्य हलधर महतो, पूरन महतो, आरडी मांझी, देवकीनंदन बेदिया, पूनम देवी और आइसा के छात्र नेता त्रिलोकी नाथ शामिल रहेंगे.

टीम कोल प्रभावित ग्रामीणों और रैयतों से बातचीत कर पूरे मामले की जानकारी लेगी. इसके अलावा पिछले तीन महीने से जेल में बंद रायमुनी सोरेन के परिजनों से भी मुलाकात की जायेगी. तेलांगापाड़ा निवासी मीकू टुडू के साथ पुलिस द्वारा कथित मारपीट के मामले की भी जानकारी ली जायेगी. जांच पूरी होने के बाद टीम अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी.

30 हजार किसान सदस्य बनाने का लक्ष्य

बैठक में पूरे शिकारीपाड़ा प्रखंड में अखिल भारतीय किसान महासभा की 30 हजार सदस्यता बनाने का निर्णय लिया गया. इसके साथ ही प्रखंड क्षेत्र में आंदोलन को और तेज करने की रणनीति पर भी चर्चा की गयी.

भूमि अधिग्रहण को लेकर केंद्र सरकार पर साधा निशाना

भुण्डा बास्की ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद कंपनियों के लिए भूमि अधिग्रहण को बढ़ावा दिया जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड में आदिवासियों, किसानों और कमजोर वर्ग के लोगों की जमीन ग्रामसभा की अनुमति के बिना अधिग्रहित करने का प्रयास किया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि किसानों को एकजुट कर उनके अधिकारों की लड़ाई को मजबूत किया जायेगा. बैठक में संगठन को मजबूत करने और जन मुद्दों को लेकर आंदोलन को व्यापक बनाने पर भी जोर दिया गया.

मौके पर सुरेश मुर्मू, संन्यासी हेम्ब्रम, रामेश्वर टुडू, प्रकाश सोरेन, जीवन मुर्मू, शितियस हांसदा, मंटू मरांडी और जाम्बड़ू बास्की सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे.

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By Anand Jayswal

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