मत मारी गयी जो पीयेंगे डोभा का पानी

मुसीबत. मुरगुज्जावासियों का छलका दर्द, मूलभूत चीजों को तरस रहे लोग, कहा काठीकुंड : प्रखंड के दूरस्थ पंचायत स्थित मुरगुज्जा गांव के ग्रामीण पेयजल की कमी का दंश झेलने को मजबूर हैं. पहाड़िया बाहुल्य इस गांव में 40 परिवार निवास करते हैं. मूलभूत सुविधाओं के नाम पर बिजली है, लेकिन उसकी सेवा नहीं मिल रही. […]

मुसीबत. मुरगुज्जावासियों का छलका दर्द, मूलभूत चीजों को तरस रहे लोग, कहा

काठीकुंड : प्रखंड के दूरस्थ पंचायत स्थित मुरगुज्जा गांव के ग्रामीण पेयजल की कमी का दंश झेलने को मजबूर हैं. पहाड़िया बाहुल्य इस गांव में 40 परिवार निवास करते हैं. मूलभूत सुविधाओं के नाम पर बिजली है, लेकिन उसकी सेवा नहीं मिल रही. गांव तक पहुंचने को सड़क तो है, पर यह पथरीली व कांटे की तरह चूभनेवाली.
जिसमें चलते वक्त सड़क का एहसास नहीं होता. बस बड़े-बड़े पत्थर हैं, जिन पर चलना लोगों की मजबूरी है. अब तो आदत ही बन चुकी है. इतने के बावजूद ग्रामीणों को इन सारी समस्याओं का उतना मलाल नहीं, जितना पेयजल की कोई सुविधा नहीं होने की बात उन्हें सालती है. ग्रामीणों के लिए पेयजल या पानी का एक मात्र स्रोत झरने का पानी है. ग्राम प्रधान लखन देहरी ने बताया कि झरने का पानी रोक कर डोभा का रूप दिया गया है
और वर्षों से पानी का एक मात्र जरिया भी यही है. डोभा भी गांव से लगभग एक किलोमीटर दूरी पर पथरीले राहों पर है.
ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं से अवगत कराया.
अगर शुद्ध पानी की व्यवस्था रहती तो डोभा का गंदा पानी पीकर अपने और अपने परिवार की जान को जोखिम में क्यों डालते.
– बुधनी महारानी, ग्रामीण
डोभा से पानी मुश्किल से मिल पाता है, उस पर आवास का काम आ गया. अब आवास में पानी लगाये या खुद के लिए सुरक्षित रखे.
– सुमरी कुमारी, ग्रामीण
प्रधान ने कहा
कुछ वर्ष पहले पीएचडी विभाग से एक कुआं निर्माण कराया जा रहा था, जो अब तक अधूरा पड़ा है. कुएं में मवेशी गिर कर मर गया था, जिसके बाद ग्रामीणों ने मवेशी के बदले हर्जाना मांगा था. संवेदक हर्जाना देने की बात मान गया था, लेकिन हर्जाना नहीं मिलने की वजह से अब तक कुआं अधूरा पड़ा रह गया. अब तो संवेदक दोबारा काम कराने ही पहुंच रहा है.
– श्री देहरी, प्रधान

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