बस डिपो में लगी भीषण आग

मुसीबत. चार-पांच किमी दूर से ही दिख रहे काले धुएं के गुबार, हताहत नहीं अग्निशमन विभाग से पहुंची दो दमकल की गाड़ियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर किसी तरह पाया काबू डिपो से बंगाल के लिये दो बसों के अलावे किसी भी बस की यहां से नहीं होती रवानगी दुमका : उपराजधानी दुमका […]

मुसीबत. चार-पांच किमी दूर से ही दिख रहे काले धुएं के गुबार, हताहत नहीं

अग्निशमन विभाग से पहुंची दो दमकल की गाड़ियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर किसी तरह पाया काबू
डिपो से बंगाल के लिये दो बसों के अलावे किसी भी बस की यहां से नहीं होती रवानगी
दुमका : उपराजधानी दुमका में राज्य पथ परिवहन निगम के सरकारी बस डिपो में बुधवार की दोपहर भीषण आग लग गयी. आग इस कदर फैल चुकी थी कि चार-पांच किलोमीटर दूर से काले धुएं का गुबार दिखाई पड़ रहा था. सरकारी बस डिपो के जिस हिस्से में आग लगी थी, वहां दर्जनों पुरानी बसें तथा खोले गये पुराने टायर, जले हुए मोबिल आदि पड़े हुए थे. इस डिपो में निगम का अपना पेट्रोल पंप भी था. हालांकि वर्षों से यह पंप भी बंद पड़ा है.
आग लगने की सूचना मिलते ही दमकल की दो गाड़ियां मौके पर पहुंच गयी तथा भारी मशक्कत से आग काबू पाया. सरकारी बस डिपो के आसपास तेजी से आग फैलने की वजह से आसपास बने मकानों में रहने वालों की मुश्किलें बढ़ गयी. बता दें कि राज्य पथ परिवहन निगम के इस डिपो से फिलहाल राज्य सरकार की एक भी बस नहीं चलती. यहां से पश्चिम बंगाल की दो बसें ही मात्र चला करती है. बस पड़ाव झाड़ियों से भरा हुआ है. जिस वक्त आग लगी, उस वक्त प्राइवेट बसें इस डिपो के दूसरे छोर पर लगी हुई थी, जिसे आनन-फानन में बाहर निकाला गया. आग लगने की खबर फैलते ही भारी भीड़ डिपो के पास जमा हो गयी थी. प्रखंड विकास पदाधिकारी दिलीप कुमार महतो और पुलिस इंस्पेक्टर विष्णु प्रसाद चौधरी स्थिति पर नजर बनाये हुए थे.
पिछले साल ही तोड़ा गया था नवनिर्मित मकान
सरकारी बस पड़ाव की जमीन पर अवैध तरीके से मकान बना लेने की शिकायत पर तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी जिशान कमर ने कार्रवाई करायी थी और जेसीबी लगवाकर एक दिन में नवनिर्मित मकान को ध्वस्त करवा दिया था. मामले में मुख्यमंत्री जनसंवाद में शिकायत की गयी थी. कुछ और लोगों द्वारा भी सरकारी बस पड़ाव को अतिक्रमित कर लेने की बात सामने आयी थी, पर उस पर कार्रवाई नहीं की जा सकी थी.
खुले आसमान के नीचे सड़ रही पचास से अधिक बसें
इस सरकारी बस डिपो के अंदर ही बिहार राज्य पथ परिवहन निगम के दुमका डिवीजन का कार्यालय भी हुआ करता था. यही वजह है कि इस डिपो में तमाम सुविधाएं थी. जैसे-जैसे प्राइवेट बसें बढ़ी, उसी तरह लूट-खसोट की वजह से सरकारी बसें ठप पड़ती गयीं. यहां पचास से भी अधिक बसें खुले आसमान के नीचे दशकों से पड़ी हुई है, जिसकी नीलामी तक विभाग नहीं कर सका.
बस डिपो असामाजिक तत्वों का अड‍्डा बना
सरकारी बस डिपो दिन ही नहीं रात के वक्त भी असामाजिक तत्वों का अड‍्डा बना रहता है. हर तरह के गलत काम इस सरकारी बस डिपो के अंदर होते हैं. गंजेड़ियों-नशेड़ियों व जुआड़ियों की जमघट तो यहां रहती ही है, देह व्यापार का भी यह अड‍्डा बना हुआ है.
लगभग दस एकड़ में फैला है सरकारी बस डिपो
दुमका का सरकारी बस डिपो लगभग दस एकड़ में फैला हुआ है. इस सरकारी बस डिपो की जमीन अलग अलग हिस्सों से अतिक्रमित हो चुकी है. दो-तीन साल पहले ही सरकारी बस पड़ाव में कुछ लोगों ने अवैध ढंग से कब्जा जमाने की कोशिश की थी, जिसमें पुलिस को बड़ी कार्रवाई करनी पड़ी थी तथा दर्जनों को गिरफ्तार कर जेल भी भेजना पड़ा था.

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