दुमका : महर्षि मेंहीं आश्रम पुसारो-हथियापाथर में आयोजित जिला संतमत सत्संग के 30वें वार्षिक अधिवेशन के दूसरे दिन स्वामी वेदानंद ने कहा कि मन की अपवित्रता को दूर करने के लिए हमें आध्यात्मिक साधनायें जरूर करनी चाहिए. जैसे फूल हाथ में लेते ही सुगंध आती है या चंदन को पत्थर पर घीसने से ही उसकी खुशबू का अहसास हो जाता है, ठीक उसी प्रकार निरंतर ईश्वर का चिंतन करते रहने से आध्यात्मिक जागृति होती है. उनकी कृपा के बिना कुछ भी नहीं पाया जा सकता. इसलिए हमें अपने हृदय की गहराई से ईश्वर के नाम का जप करना चाहिए और पूरी श्रद्धा से भगवान के शरणागत में जाना चाहिए.
जीवनकाल में ही करें मोक्ष लाभ की आशा : वेदानंद
दुमका : महर्षि मेंहीं आश्रम पुसारो-हथियापाथर में आयोजित जिला संतमत सत्संग के 30वें वार्षिक अधिवेशन के दूसरे दिन स्वामी वेदानंद ने कहा कि मन की अपवित्रता को दूर करने के लिए हमें आध्यात्मिक साधनायें जरूर करनी चाहिए. जैसे फूल हाथ में लेते ही सुगंध आती है या चंदन को पत्थर पर घीसने से ही उसकी […]
