मंत्री जी! संताल में कैसे आयेगी हरित क्रांति

संताल परगना के पचास प्रखंडों में प्रखंड कृषि पदाधिकारियों के कुल 74 पद सृजित महज चार हैं कार्यरत तीन देवघर व एक साहिबगंज के बरहरवा में पदस्थापित दुमका : संताल परगना में कृषि विकास को लेकर राज्य सरकार का रवैया उदासीन है. दरअसल इस विभाग में पदाधिकारियों की घोर कमी है. जिसके चलते सरकार द्वारा […]

संताल परगना के पचास प्रखंडों में प्रखंड कृषि पदाधिकारियों के कुल 74 पद सृजित

महज चार हैं कार्यरत
तीन देवघर व एक साहिबगंज के बरहरवा में पदस्थापित
दुमका : संताल परगना में कृषि विकास को लेकर राज्य सरकार का रवैया उदासीन है. दरअसल इस विभाग में पदाधिकारियों की घोर कमी है. जिसके चलते सरकार द्वारा चलायी जाने वाली योजनाओं का न तो ढंग से क्रियान्वयन हो पा रहा है और न ही उसका लाभ किसानों को पूरा-पूरा मिल पा रहा है. संताल परगना के पचास प्रखंडों में प्रखंड कृषि पदाधिकारियों के कुल 74 पद सृजित हैं, लेकिन उसमें कार्यरत हैं महज चार. उसमें भी तीन देवघर जिले में ही हैं.
एक अन्य साहिबगंज जिले के बरहरवा में पदस्थापित हैं. ऐसे में विभाग का कामकाज किस तरीके से चल पा रहा होगा, इसका सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है.
प्रखंड कृषि पदाधिकारी के 74 में से 70 पद पड़े हैं रिक्त
ये पद पड़े हुए हैं रिक्त
दुमका में अनुदेशक कृषि शस्य
अनुदेशक कृषि रसायन
अनुदेशक कृषि पौधा संरक्षण
अनुदेशक कृषि अभियंत्रण
जिला प्रशिक्षण पदाधिकारी
जिला योजना एवं मूल्यांकन पदाधकारी
कनीय पौधा संरक्षण पदाधिकारी
प्रशिक्षण पदाधिकारी बीज व गुण नियंत्रण व फसल व वागवानी
प्रसार व व्यवसायिक प्रशिक्षण तथा महिला कृषि प्रसार पदाधिकारी
साहिबगंज व दुमका में अनुमंडल कृषि पदाधिकारी
सभी जिलों में कृषि निरीक्षक
कृषि निरीक्षक प्रक्षेत्र
सभी जिलों में प्रखंड कृषि पदाधकारी व
सहायक कृषि पदाधकारी
संयुक्त कृषि निदेशक का कार्यालय भी खाली
संप के संयुक्त कृषि निदेशक का कार्यालय खुटाबांध में है. यह कार्यालय भी पदाधिकारियों-कर्मचारियों की कमी से वीरान है. कार्यालय में संयुक्त कृषि निदेशक के अधीनस्थ चार विशेषज्ञ अनुदेशकों हैं, जो लंबे समय से खाली है. इसके अलावा सहायक कृषि सूचना पदाधिकारी एवं कनीय कृषि सूचना पदाधिकारी का पद खाली पड़ा हुआ है. न तो यहां प्रधान लिपिक हैं, न आशुलिपिक और न ही कोई जीप चालक.
जसे को छोड़ बस 25 अधिकारी-कर्मचारी
विभाग ने जनसेवक की बहाली की है. पर जनसेवकों से कृषि से संबंधित काम कम, दूसरे तरह के काम ज्यादा लिये जा रहे हैं. जनसेवक के लिए पूरे प्रक्षेत्र में 290 पद सृजित हैं, जिनमें से 281 पदों पर कार्यरत हैं और केवल 9 रिक्त पड़े हुए हैं. लेकिन अन्य जो 189 पद सृजित हैं, उनमें से महज 25 ही कार्यरत हैं.
”प्रक्षेत्र में पदाधिकारियों-कर्मचारियों की कमी है. बीटीएम से काम लिया जा रहा है. जो काम सात दिनों में हो सकता है, उसमें पंद्रह दिनों से अधिक का वक्त लग जा रहा है. लंबे समय से नियुक्ति नहीं होने और कर्मियों के सेवानिवृत्त होने से ऐसी समस्या पैदा हुई है.”
– रामनारायण प्रसाद, संयुक्त कृषि निदेशक, संप प्रक्षेत्र

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