दुमका : भारी विरोध के बाद आखिरकार जिला प्रशासन को जनजातीय हिजला मेला के तिथि में परिवर्त्तन कर देना पड़ा है. पूर्व में इस मेले के आयोजन के लिए 15 से 22 फरवरी की तिथि तय की गयी थी. 15 फरवरी सोमवार का दिन पड़ रहा था, जिसका विरोध शुरू हो गया था. दरअसल 1890 से चले आ रहे इस मेले की परंपरा थी कि अब तक यह जनजातीय मेला शुक्रवार से ही शुरु होता रहा था और अगले शुक्रवार तक चलता था. जिला प्रशासन ने तिथि परिवर्तित कर इसे 19 फरवरी से 26 फरवरी तक आयोजित कराने का फैसला किया है.
अब हिजला मेला 19 फरवरी से
दुमका : भारी विरोध के बाद आखिरकार जिला प्रशासन को जनजातीय हिजला मेला के तिथि में परिवर्त्तन कर देना पड़ा है. पूर्व में इस मेले के आयोजन के लिए 15 से 22 फरवरी की तिथि तय की गयी थी. 15 फरवरी सोमवार का दिन पड़ रहा था, जिसका विरोध शुरू हो गया था. दरअसल 1890 […]

मेला समिति के अध्यक्ष सह डीसी राहुल कुमार सिन्हा ने बताया कि मेला समिति की बैठक में परम्परागत रूप से हिजला मेला के आयोजन के आयोजन में माघ शुक्ल की प्रधानता के मद्देनजर 15 से 22 फरवरी की तिथि तय की गयी थी, उस वक्त बैठक में उपस्थित ग्राम प्रधान ने शुक्रवार की तिथि को पूजा होने तथा अन्य दिन यह पूजा न हो सकने की जानकारी समिति के समक्ष नहीं रखा था. अब ऐसी बात सामने आने पर तथा शुक्रवार की पूजा को ध्यान में रखते हुए राजकीय जनजातीय हिजला मेला महोत्सव 19 से 26 फरवरी तक होगा. डीसी ने मेले से जनजातीय शब्द हटाने के भ्रम को भी दूर कर दिया है
और कहा है कि इस मेला का नाम ‘राजकीय जनजातीय हिजला मेला महोत्सव’ ही है और इसे लेकर भी भ्रम नहीं होना चाहिए. उल्लेखनीय है कि इस मुद्दे को लेकर रविवार को जहां विधायक-सांसद व सीएम का पुतला दहन हुआ था, वहीं सोमवार को एक प्रतिनिधिमंडल ने आयुक्त के नाम ज्ञापन सौंपा था और आपत्ति प्रकट की थी.