विजन के साथ हो योजनाओं का क्रियान्वयन

दुमका : जिले की कुल आबादी 13 लाख से अधिक है, जो दस प्रखंडों में निवास करती है. इस क्षेत्र में न तो कल कारखाने हैं और न ही कोई बड़ा उद्योग. यहां रहने वाले लोगों की आजीविका का मुख्य साधन कृषि ही है, पर सिंचाई की समुचित व्यवस्था नहीं रहने से किसान एक ही […]

दुमका : जिले की कुल आबादी 13 लाख से अधिक है, जो दस प्रखंडों में निवास करती है. इस क्षेत्र में न तो कल कारखाने हैं और न ही कोई बड़ा उद्योग. यहां रहने वाले लोगों की आजीविका का मुख्य साधन कृषि ही है, पर सिंचाई की समुचित व्यवस्था नहीं रहने से किसान एक ही उपज ले पाते हैं.

भालको के तहत उद्वह सिंचाई की अधिकांश परियोजनाएं मृत पड़ी हुई हैं. मसानजोर का दायां तट नहर अब तक नहीं बन पाया है. बायां तट नहर के भरोसे ही थोड़ी सिंचाई हो पाती है. रानीश्वर प्रखंड में दिगलपहाड़ी, बड़ानदी व कैराबनी जलाशय से नहर तो निकले हैं, लेकिन इनका दायरा नहरों की बदहाली के कारण सीमित है. नीमबनी व जयपहाड़ी में भी मिट्टी के बांध हैं, पर उसका लाभ अभी नहीं के बराबर मिल रहा है. इसी तरह जामा, सरैयाहाट, मसलिया में जो चेकडैम बने हैं,

उसका लाभ भी पूरा-पूरा किसानों को नहीं मिल रहा है. जरमुंडी में आइटीआइ बन रहा है, सरैयाहाट में बन चुका है. इसी तरह हंसडीहा में डेयरी इंजीनियरिंग कॉलेज का भी भवन बना हुआ है, पर पढ़ाई शुरू नहीं करायी जा सकी है. इन संस्थानों के चालू होने से तकनीकी शिक्षा से युवाओं को जोड़ा जा सकेगा.

जिला तसर उत्पादन में अग्रणी है. ऐसे में बंजर भूमि विकास के लिए पहल करने और तसर उत्पादन में विशेष जोर दिये जाने की आवश्यकता है. लाह उत्पादन पर जोर देकर भी आय सृजन से लोगों को जोड़ा जा सकता है. वर्षा जल संचय करने, वृक्षारोपण, बागवानी, सब्जी उत्पादन, हरा चारा उत्पादन को बढ़ावा देने जैसी योजनाओं को भी प्राथमिकता से लिए जाने जाने की जरूरत है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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