दुमका : मकर संक्रांति के पर संताल परगना के विभिन्न इलाकों से हजारों की संख्या साफाहोड़ धर्मगुरुओं और उनके अनुयायियों का जमावड़ा जामा प्रखंड के बारापलासी के निकट तातलोई गरम जल कुंड में हुआ.
अलग-अलग टोलियों में बंटकर साफाहोड़ आदिवासियों ने त्रिशूल की पूजा की. साथ-साथ श्रीराम की अराधना की. इससे पूर्व साफाहोड़ आदिवासियों ने परंपरागत रीति-रिवाज के तहत तुलसी के पौधे व त्रिशुल पर जलार्पण किया तथा भजन गाया. साफाहोड़ महिलाएं एवं पुरुष कांसे के लोटे में जल, तथा थाली में फल और लड्डू-बतासे लेकर पहुंचे थे. बता दें कि साफाहोड़ आदिवासी मांस-मदिरा से दूर रहते हैं और सादा जीवन जीते हैं. तातलोई में जुटे अधिकांश आदिवासी सफेद वस्त्र धारण करके ही पहुंचे थे और जिस झंडे की उनके द्वारा पूजा की गयी, वह झंडा भी सफेद ही था.
सभी जलकुंडों की है उष्णता अलग-अलग
इन जलकुंडों में पानी की उष्णता अलग-अलग है. सबसे ज्यादा गर्म पानी तातलोई के उस कूप के पानी की है, जिससे प्राकृतिक रूप से खौलता हुआ गर्म पानी निकलता रहता है. अन्य दो कुंडों में पानी सामान्य से कुछ गर्म रहता है.जहां लोग जाड़े के दिनों में गर्मपानी से स्नान का भरपूर आनंद उठाते हैं. वहीं कुंड से सटे नदी का पानी हमेशा ठंडा ही रहता है.
गर्म जल कुंड है आकर्षण का केंद्र
भुरभुरी नदी के तट पर स्थित गर्मजल कुंड के कारण प्रसिद्ध तातलोई में तीन कुंड पहले से हैं. पर्यटन विभाग ने इस जलकुंड का सौंदर्यीकरण कराना प्रारंभ किया है. एक नये जलकुंड का निर्माण किया गया है. इसके अलावा कुंड के घाटों को दुरुस्त किया गया है. चेकर्स टाइल्स लगवाये गये हैं. रंग-रोगन भी करवाया गया है.
तातलोई में तीन दिवसीय मेले की हुई शुरुआत
तातलोई गर्म जलकुंड में मकर संक्रांति के अवसर पर तीन दिवसीय मेले की शुरुआत गुरुवार को हुई. हालांकि आसपास के इलाकों में मकर संक्रांति लोग शुक्रवार को ही मना रहे हैं. ऐसे में गुरुवार की तुलना में शुक्रवार को ज्यादा भीड़ जुटने की संभावना है. लगभग तीन दशक के बाद जल कुंडों के जीर्णोद्धार से इस स्थल के विकास की उम्मीदें बढ़ गयी है.
यही वजह है कि तातलोई गर्मजल कुंड पर लगने वाले इस मेले में ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा भारी संख्या में शहरी लोगों की भीड़ बनी रही. कई लोगों ने अवसर पर पिकनिक का आनंद भी उठाया. मेले में साज-सज्जा के सामानों के अलावा खाने-पीने के सामानों की बिक्री भी जमकर हुई. कठघोड़वा जैसे झूले तो आकर्षण का केंद्र थे ही, दूसरे झूलों का भी बच्चों ले खूब आनंद उठाया.
