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पशुपालकों को अजोला उत्पादन का प्रशिक्षण मिला प्रतिनिधि, बासुकिनाथझारखंड गव्य विकास निदेशालय के सौजन्य से शनिवार को जरमुंडी प्रखंड के चोरडीहा गांव में एक दिवसीय अजोला विकास प्रशिक्षण शिविर का आयोजन हुआ. जिसमें केवीके के कृषि विज्ञान केंद्र से डाॅ संजय कुमार एवं जिला कार्यक्रम प्रभारी विकास सिंह मुख्य रूप से कार्यक्रम में उपस्थित थे. […]

पशुपालकों को अजोला उत्पादन का प्रशिक्षण मिला प्रतिनिधि, बासुकिनाथझारखंड गव्य विकास निदेशालय के सौजन्य से शनिवार को जरमुंडी प्रखंड के चोरडीहा गांव में एक दिवसीय अजोला विकास प्रशिक्षण शिविर का आयोजन हुआ. जिसमें केवीके के कृषि विज्ञान केंद्र से डाॅ संजय कुमार एवं जिला कार्यक्रम प्रभारी विकास सिंह मुख्य रूप से कार्यक्रम में उपस्थित थे. वैज्ञानिक डाॅ संजय कुमार ने पशुपालकों को आजोला उत्पादन के विधि से अवगत कराया. कहा पशुओं को अजोला खिलाने से न केवल दूध में वृद्धि होती है बल्कि पशु के शरीर में भी चमक आता है. अजोला धान के खेत में उत्पादन करने से खरपतवार का नियंत्रण होता है साथ ही 400-500 किलोग्राम नाइट्रोजन जमीन में स्थापित होता है. उन्होंने बताया कि अजोला पशुपालकों के लिए वरदान है. जिला कार्यक्रम प्रभारी विकास सिंह ने बताया कि अजोला पानी की सतह पर तैरने वाला तथा तेजी से वृद्धि करने वाला हरा अद्भूत छोना फर्न है. अजोला को फीड सप्लीमेंट एवं वायो फर्टिलाइजर के रूप में उपयोग में लाया जाता है. बहुत ही सधारण तकनीक से अजोला का उत्पादन किया जा सकता है. सहारा, तालझारी, रायकिनारी, केंदखपरा आदि गांवों के किसानों को अजोला उत्पादन की जानकारी मिली. मौके पर सहारा केंद्र प्रभारी महेश कुमार, तालझारी केंद्र प्रभारी पंकज कुमार, अभय पांडेय, नकुल मंडल, श्रीकांत मंडल, कमल मंडल, कनेंद्र दास, मिंटू कुमार मंडल, प्रकाश कुमार मंडल, सुनील मंडल, विपिन यादव आदि किसान मौजूद थे. फोटो-19 बासुकिनाथ प्रशिक्षण-01——————अजोला उत्पादन की विधि बताते कृषि वैज्ञानिक——————

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