लीड. जिस हृदय में छल, प्रपंच व कपट हो, उसे कभी नहीं अपनाते भगवान संवाददाता, दुमकाउपराजधानी दुमका के रसिकपुर बड़ा बांध मैदान में आयोजित सात दिवसीय श्रीराम कथा के चौंथे दिन अयोध्या से आये कथा व्यास स्वामी प्रभंजनानंद शरण ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के वात्सल्य लीलाओं का सरस वर्णन किया. उन्होंने कहा कि भगवान का आगमन ऐसे दामपत्य जीवन में होता है, जो औरों को यश प्रदान करे. जिसने अपनी दसों इंद्रियों पर विजय प्राप्त कर लिया हो, वही दशरथ है. स्वामी प्रभंजनानंद शरण ने कहा कि जो मनुष्य दूसरों की गलती को अपने उपर लेता है, वह सबका प्रिय बन जाता है और सभी उसे स्नेह करते हैं.स्वामी प्रभंजनानंद शरण ने कहा कि भगवान राम ने ताड़का सहित कितने राक्षसों का वध किया. सबको दैत्य जीवन मुक्त किया. राक्षस वैर भाव से ही भगवान का सुमिरन करते रहे और परम पद को प्राप्त करते रहे थे. उन्होंने कहा कि हमारा जीवन ऐसा हो, जिसमें प्रभु का स्मरण होता रहे. पद्धति भले ही अलग अलग हो, लेकिन ध्येय उनकी असीम भक्ति से उन्हें पाने की होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रभु को कपट रहित निर्मल मन ही स्वीकार है. जिस हृदय में छल प्रपंच और कपट भरा था, भगवान उन्हें कभी नहीं अपनाते. उन्होंने कहा कि अभिमान मानव जीवन का सबसे बड़ा शत्रु है. जिसके जीवन में अभिमान हो, वो भगवान को कभी प्राप्त नहीं कर सकता. इस क्रम में स्वामी प्रभंजनानंद शरण ने श्रीराम की बाल लीलाओं का भी सुमधुर वर्णन किया. श्रीराम कथा श्रवण के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु कथास्थल पहुंचे थे. कर्णप्रिय भजन को सुनकर ये सभी श्रीराम की भक्ति में रमें रहे. आयोजन को सफल बनाने के लिए व्यवस्था में संचालक मंडली के अध्यक्ष यशवंत कुमार सिन्हा, सचिव विनय कुमार, उप सचिव अरबिंद प्रसाद, कोषाध्यक्ष सितेश मिश्र, दिलीप वर्मा, आशीष कुमार दे, रंजीत तिवारी, संजय आर्या, डोमन साह, मुंशी मंडल आदि सक्रिय दिखे………..फोटो30 दुमका 7 एवं 8………..
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