आनंद जायसवाल
दुमका :संताल परगना में भू-सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त कार्य की प्रगति कछुए चाल से हो रही है. 1978 से यह काम शुरू हुआ था, तब संताल परगना एक जिला हुआ करता था. अब संताल परगना में छह जिले हो चुके हैं. साढ़े तीन दशक बीत जाने के बाद भी अब तक केवल दो ही अंचल के ही परचा का अंतिम प्रकाशन हो सका है, जबकि संताल परगना के शेष 39 अंचलों में यह काम अब तक नहीं हुआ है.
जिन दो अंचल जामा एवं गोपीकांदर में परचा का अंतिम प्रकाशन हुआ है, वे दोनों दुमका जिले के ही हैं, लेकिन अन्य जिलों के एक भी अंचल का काम इस चरण तक नहीं पहुंच सका है. जानकार बताते हैं कि अंतिम प्रकाशन जिन दोनों अंचलों के हुए हैं, उनमें कई तरह की विसंगतियां है, जिससे रैयतों को भारी परेशानी हो रही है. गोचर जमीन को परती कदीम दिखा दिये जाने की भी शिकायतें मिल रही हैं.
