प्रतिनिधि, शिकारीपाड़ाप्रखंड के सिमानीजोर पंचायत के छातुपाड़ा गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. इस गांव में पहाडि़या एवं संताल आदिवासी के सत्तर घर हैं. राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत गांव में बिजली तो पहुंचायी गयी थी, लेकिन एक भी दिन बिजली नहीं जली. गांव में पांच टोला चौकीदार टोला, मांझी टोला, छत्तार टोला, लेटो टोला एवं डीलर टोला है. जिनमें कुल आठ चापानल है और सब के सब आज बेकार साबित हो रहे हैं. ग्रामीण गांव से एक से डेढ़ किलोमीटर दूर छतनी झरना व होहो झारना से पानी लाकर पीने के लिए व्यवहार करते हैं. ग्रामीण देवा देहरी, लखना देहरी, लुखी रानी, सोनामुनी बास्की, कहां टुडू, पानसुरी मरांडी आदि के अनुसार झरना का पानी पीना मजबूरी है. इस पानी को पीकर लोग गांव में अक्सर बीमार भी पड़ते रहते हैं. जिस रास्ते से ग्रामीण झरना का पानी लाते हैं, वह सड़क भी पथरीली है.पांच साल में भी नहीं बना बिरसा आवासइस गांव में समरी रानी, सुमित्रा रानी, मनसा देहरी, सुकु देहरी समेत नौ व्यक्तियों को बिरसा आवास पांच साल पहले स्वीकृत हुआ था. पांच साल में यह आवास पूरा नहीं किया गया है. वहीं दूसरी ओर सुमित्रा रानी व मनसा देवी के आवास के लिए नींव भर ही रखा जा सका है.अक्सर बंद रहता है स्वास्थ्य उपकेंद्रछातुपाड़ा में पहाडि़या लोगों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के मकसद से विशेष पहाडि़या स्वास्थ्य उपकेंद्र स्थापित है. जिसमें एक चिकित्सक, एक एएनएम एवं एक पुरुष स्वास्थ्य कार्यकर्ता पदस्थापित हैं. फूलमनी रानी, लुखीरानी, लखना देहरी एवं धर्मा देहरी के अनुसार गांव का स्वास्थ्य केंद्र कभी-कभी ही खुला मिलता है.——————फोटो17-शिकारीपाड़ा-1/2/3/4/5——————
मूलभूत सुविधाओं से वंचित है छातुपाड़ा
प्रतिनिधि, शिकारीपाड़ाप्रखंड के सिमानीजोर पंचायत के छातुपाड़ा गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. इस गांव में पहाडि़या एवं संताल आदिवासी के सत्तर घर हैं. राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत गांव में बिजली तो पहुंचायी गयी थी, लेकिन एक भी दिन बिजली नहीं जली. गांव में पांच टोला चौकीदार टोला, मांझी टोला, छत्तार टोला, लेटो […]
