प्रतिनिधि, रानीश्वर गोबिंदपुर पंचायत के आलगपाथर आंगनबाड़ी केंद्र का भवन ही नहीं है़ भवन के लिए बनी दीवार के उपर पानी टंकी लगा दी गयी है. 1996 में आलगपाथर आंगनबाड़ी केंद्र के भवन के लिए एक लाख 55 हजार से भवन की स्वीकृत मिली थी़. कम लागत होने के कारण काम अटक गया. अंत में गांव के आंगनबाड़ी सेविका को ही भवन निर्माण कार्य का अभिकर्त्ता बना दिया गया़ 2002 में आंगनबाड़ी सेविका के नाम पर भवन निर्माण कार्य का एकरारनामा कर दिया गया़ सेविका द्वारा भवन निर्माण के लिए दीवार बना दी गयी. राशि कम होने के कारण वह भवन की छत की ढलाई नहीं हो सकी. ग्रामीणों का कहना है कि पानी टंकी में पानी चढ़ाने के लिए बिजली की आवश्यकता है़ एक तो भवन नहीं है़ दूसरा उस भवन में बिजली कनेक्शन भी नहीं है़ इस परिस्थिति पर बोरिंग कर पानी टंकी लगाना कहां तक उचित है़ पानी टंकी के बदले सिर्फ चापानल गाड़ देने से बच्चों को कम से कम पीने के लिए पानी मिल पाता. ———————फोटो 16 डीएमके/रानीष्वरआलगपाथर का अपूर्ण आंगनबाड़ी भवन के दीवार पर लगा पानी टंकी———————-
भवन की दीवार पर लगा दी पानी टंकी
प्रतिनिधि, रानीश्वर गोबिंदपुर पंचायत के आलगपाथर आंगनबाड़ी केंद्र का भवन ही नहीं है़ भवन के लिए बनी दीवार के उपर पानी टंकी लगा दी गयी है. 1996 में आलगपाथर आंगनबाड़ी केंद्र के भवन के लिए एक लाख 55 हजार से भवन की स्वीकृत मिली थी़. कम लागत होने के कारण काम अटक गया. अंत में […]
