दुमका में इमसे ने आयोजित किया मीडिया वर्कशॉप, कहा:

किसानों को जैविक खेती करने की जरूरतज्यादा फसल उपजाने की लालच में रासायनिक उर्वरक एवं कीटनाशकों के प्रयोग पर निषेधउत्पन्न होती है कई तरह की जानलेवा बीमारीसंवाददाता, दुमकास्वयंसेवी संस्था इंस्टीच्यूट फोर मोटिवेटिंग सेल्फ इंप्लॉयमेंट (इमसे) द्वारा शुक्रवार को मीडिया वर्कशॉप का आयोजन किया गया, जिसमें रासायनिक कीटों के इस्तेमाल से प्रकृति एवं मानव जीवन पर […]

किसानों को जैविक खेती करने की जरूरतज्यादा फसल उपजाने की लालच में रासायनिक उर्वरक एवं कीटनाशकों के प्रयोग पर निषेधउत्पन्न होती है कई तरह की जानलेवा बीमारीसंवाददाता, दुमकास्वयंसेवी संस्था इंस्टीच्यूट फोर मोटिवेटिंग सेल्फ इंप्लॉयमेंट (इमसे) द्वारा शुक्रवार को मीडिया वर्कशॉप का आयोजन किया गया, जिसमें रासायनिक कीटों के इस्तेमाल से प्रकृति एवं मानव जीवन पर पड़ने वाले असर पर विस्तार से चर्चा की गयी तथा चिंता व्यक्त की गयी. मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए सामाजिक कार्यकर्ता सीएन मिश्रा एवं बुद्धिजीवी छाया गुहा ने हरि क्रांति के नाम पर रासायनिक उर्वरक एवं कीटनाशकों के प्रयोग में कृषि कार्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है. वहीं इमसे के सस्टेनेबल एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के को-ऑर्डिनेटर निखिल मोइति ने कहा कि कृषि क्रांति आज कृषि व्यापार हो गया है. ज्यादा फसल उपजाने की लालच में किसान जाने-अनजाने रासायनिक उर्वरक एवं कीटनाशकों का उपयोग कर अपने खेत की मिट्टी को बरबाद कर रहे हैं. इसके परिणाम से पर्यावरण भी दूषित हो रहा है. मिट्टी की प्रकृति बदलने से जहां उत्पादन पूरी तरह रासायन पर ही टिका रह गया है, वहीं कैंसर, टीवी, अल्सर आदि खतरनाक बीमारियां मनुष्य एवं जीव जंतुओं को मृत्यु की ओर ढकेलने लगी है. श्री मोइति ने बताया कि इमसे दुमका एवं पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले में किसानों को इन विषयों पर लगातार जागरूक कर रही है और जैविक खेती के लिए उन्हें प्रोत्साहित भी कर रही है. आने वाले दिनों में इसके आशातीत परिणाम नजर आयेंगे. ———————15-दुमका-71———————

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