खबरें अदालत की// सामूहिक दुष्कर्म के आरोपित का पता लगाने में पुलिस रही विफल

दुमका कोर्ट. रामगढ़ थाना क्षेत्र के बुढ़ाडंगाल की 15-16 वर्ष की नाबालिग लड़की के साथ चार वर्ष पूर्व हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले में पीडि़ता को न्याय दिलाने में पुलिस विफल रही. रामगढ़ थाना कांड संख्या 60/11 भादवि की धारा 376 जी के तहत दो अज्ञात के विरुद्ध पीडि़ता के बयान पर 22 अप्रैल 2011 […]

दुमका कोर्ट. रामगढ़ थाना क्षेत्र के बुढ़ाडंगाल की 15-16 वर्ष की नाबालिग लड़की के साथ चार वर्ष पूर्व हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले में पीडि़ता को न्याय दिलाने में पुलिस विफल रही. रामगढ़ थाना कांड संख्या 60/11 भादवि की धारा 376 जी के तहत दो अज्ञात के विरुद्ध पीडि़ता के बयान पर 22 अप्रैल 2011 को प्राथमिकी दर्ज हुई थी. केस का सुपर विजन पुलिस अधीक्षक और पुलिस उपाधीक्षक द्वारा किया गया था. केस का अनुसंधान चार वर्ष तक चलता रहा. जिसमें पांच अनुसंधानकर्ता क्रमश: तीन थाना प्रभारी एस आई अशोक कुमार, अयोध्या प्रसाद, रामवतार यादव एवं एएस आई शिवकुमार सिंह, करमा उरांव ने अनुसंधान तो किया, लेकिन दुष्कर्मी का पता नहीं लगा पाये और घटना को सत्य एवं सूत्रहीन बताकर केस को बंद कर दिया और न्यायालय में 13 मई 2015 को केस डायरी के साथ अंतिम प्रतिवेदन समर्पित कर दिया. अनुसंधान के क्रम में रामगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम जवारी के गोपाल सोरेन का नाम आया था. लेकिन उसका नाम हटा दिया गया. पांच अनुसंधानकर्ता चार वर्षों में केवल पांच गवाहों का बयान दर्ज करा सके. दुष्कर्म के मामले में चार वर्षों तक अनुसंधान चलने के बावजूद नाबालिग पीडि़ता न्याय पाने से वंचित रह गयी.

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