प्रतिनिधि, गोपीकांदर गरमी की दस्तक देते ही प्रखंड के कुश्चिरा गांव में इन दिनों पेयजल संकट उत्पन्न हो गया है. करीब 1000 की आबादी वाले इस गांव में पेयजल की व्यवस्था के लिए कई साल पहले एक जल मिनार का निर्माण कराया गया था और पूरे गांव में पाइप लाइन बिछायी गई थी. लेकिन विभागीय लापरवाही की वजह से अब तक गांव में पेयजलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी है. इस गांव के आदिवासी टोला में 6 और मंदिर टोला में 4 चापालन हैं, लेकिन सभी लगभग बेकार हो चुके हैं. किसी में बहुत देर के बाद पानी निकलती है, तो कोई पूरी तरह बंद पड़ा है. वहीं घटवाल टोला में एक ही चापानल हैं, जिसमें यहां के ग्रामीण निर्भर हैं.सड़क भी हो चुका है जर्जरप्रखंड के कुश्चिरा गांव में ना केवल पेयजल बल्कि अन्य सुविधाओं की समस्या मुंह बाये खड़ी है. यहां लोगों व वाहनों की आवाजाही के लिए सड़क भी नहीं है. इस सड़क का निर्माण लगभग 20 वर्ष पूर्व आरइओ विभाग द्वारा कराया गया था, लेकिन पर्याप्त संरक्षण व मरम्मत के अभाव में सड़क जर्जर हो गयी है. दिन प्रतिदिन सड़क और जर्जर होती जा रही है यही वजह है कि सड़क में नुकीली पत्थर निकल आयी है और जगह-जगह गड्ढे बन गये हैं. इससे ग्रामीणों को आवाजाही करने तथा स्कूली बच्चों को स्कूल जाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. ग्रामीण सुनील कुमार, अंजनी तिवारी, ओम प्रकाश भगत, नंदलाल भगत, बंधु पाल, नितेश पाल, गोविंद माल आदि ने बताया कि जल मिनार बनने के बाद ग्रामीणों में काफी उम्मीदें जगी थी, कि अब ग्रामीणों को भी पीने को शुद्ध जल मिलेगा. लेकिन विभागीय लापरवाही की वजह से गांव के लोग आज भी खुद को उपेक्षित महसूस करते हैं. ………………………………..फोटो 12 गोपीकांदर 1 पेयजल के लिए बनाया गया जल मिनार. ………………………………..
कुश्चिरा गांव में है मुलभूत सुविधाओं का अभाव// पेयजल के लिए बनाया गया जल मिनार बनी शोभा की वस्तु
प्रतिनिधि, गोपीकांदर गरमी की दस्तक देते ही प्रखंड के कुश्चिरा गांव में इन दिनों पेयजल संकट उत्पन्न हो गया है. करीब 1000 की आबादी वाले इस गांव में पेयजल की व्यवस्था के लिए कई साल पहले एक जल मिनार का निर्माण कराया गया था और पूरे गांव में पाइप लाइन बिछायी गई थी. लेकिन विभागीय […]
