उदासीनता. चेकडैम का काम तीन साल में भी नहीं हुआ पूरा

संवाददाता, दुमकादुमका सदर प्रखंड के सालूकडूबा गांव के जोरिया में एक चेकडैम का निर्माण कार्य लगभग तीन साल से अधूरा ही पड़ा हुआ है. जोरिया में जिस जगह चेकडैम बन रहा है, वहां निर्माण कार्य पूरा हो जाने से किसानों को काफी सुविधा होती और जल की समुचित उपलब्धता से वे सालों भर खेती कर […]

संवाददाता, दुमकादुमका सदर प्रखंड के सालूकडूबा गांव के जोरिया में एक चेकडैम का निर्माण कार्य लगभग तीन साल से अधूरा ही पड़ा हुआ है. जोरिया में जिस जगह चेकडैम बन रहा है, वहां निर्माण कार्य पूरा हो जाने से किसानों को काफी सुविधा होती और जल की समुचित उपलब्धता से वे सालों भर खेती कर पाते. बहरहाल इसमें केवल बड़े-बड़े बोल्डर की जुड़ाई ही की गयी है. वह भी नींव से केवल तीन फीट तक उंचा ही उठाया गया है. निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाने से जो लाभ मिलने की उम्मीद लोगों की थी, वह उम्मीद धुंधली पड़ चुकी है. ग्रामीण इस बात को लेकर भी आशंकित हैं कि इस योजना के तहत जो काम होना था, कहीं उसे आधा अधूरा ही छोड़ कर भुगतान की निकासी तो नहीं कर ली गयी?——————-क्या कहते हैं ग्रामीणइस गांव के लोग खेती बाड़ी पर ही पूरी तरह आश्रित हैं. अगर इस चेकडैम का निर्माण करा लिया गया होता, तो हम सालों भर खेती कर पाते. अभी साल में एक फसल लेने के बाद जमीन खाली रह जाया करता है. – सुरेश हेंब्रम, किसानदो-ढ़ाई साल से ही यह योजना बंद पड़ी हुई है. केशियाबहाल के केंदपानी बहियार से निकले इस जोरिया में चेकडैम बन जाने से क्षेत्र के लोगों के लिए पानी की सभी जरुरतें पूरी हो सकती थी. – सुनीराम मरांडी, किसानयह चेकडैम किस विभाग से बन रहा था, इसकी जानकारी भी ग्रामीणों को नहीं है. लिहाजा वे इसे बनवाने के लिए संबंधित विभाग को दबाव भी नहीं दे पा रहे हैं. चेकडैम बन जाता, तो पानी की उपलब्धता व खेती से गांव समृद्ध होता.कृष्णा मंडल, ग्रामीण———————-फोटो6-दुमका-चेकडैम6-दुमका-सुरेश 6-दुमका-सुनीराम6-दुमका-कृष्णा—————

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