प्रतिनिधि, दुमका शहर के डंगालपाड़ा गांधी मैदान के समीप लगने वाले हाट में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है. यहां न तो पेयजल की व्यवस्था है और न ही साफ-सफाई का कोई उचित प्रबंध. इस हाट में शाक-सब्जी से लेकर छोटे-बड़े मवेशी तक का व्यापार होता है. जिसमें कई जगहों से व्यापारी आते है. यहां सप्ताह में दो दिन सोमवार एवं शुक्रवार को हाट लगता है. इस हाट में हजारों की संख्या में जानवरों को व्यापार के लिए लाया जाता है, लेकिन इनके लिए इस चिलचिलाती धूप में न तो पानी है और न ही ठहरने के लिए कोई शेड. जिससे यहां आने वाले को कई तरह की परेशानियों से दो-चार होना पड़ता है. यहां साफ -सफाई की समुचित व्यवस्था न होने से कचरों का अंबार लग जाता है. क्या कहते हैं व्यापारी’हमलोग कई वर्षों से यहां व्यापार हेतु मवेशियों को लाते हैं. इस भीषण गर्मी में खुले आसमान में ही जानवरों को रखना पड़ता है. पानी के लिए बाहर के चापाकल पर निर्भर हैं.’अबु हसन, मवेशी व्यापारी, पाकुड़ ‘हमें खुले में बैठकर सब्जी बेचना पड़ता है. ठंडे के दिनों में तो काम चल जाता है पर गर्मी के कारण बहुत परेशानी होती है. आसपास खुले जगहों में कचरे अक्सर जमा रहते है जिससे अत्यधिक दुर्गंध का सामना करना पड़ता है.’मदन पाल, सब्जी विक्रेता, रानीश्वर’पानी की समस्या के बारे में हमने अपने संबंधित अधिकारियों से बात की है उम्मीद है जल्द से जल्द मोटर लगा दिया जायेगा. जहां तक सफाई की बात है तो लोगों को इसके बारे मे जागरूक होना होगा. कई लोगों द्वारा सड़े-गले सब्जियों को जहां-तहां फेक देने से गंदगी का अंबार लग जाता है.’मंजू सोरेन, सुपरवाइजर, बाजार समिति………………….फोटो 03 दुमका 60, 61 व 6260. सुविधाविहीन मवेशी हाट प्रांगण 61. अबु हसन62. मदन पाल……………….
दुमका का मवेशी हाट प्रांगण बदहाल
प्रतिनिधि, दुमका शहर के डंगालपाड़ा गांधी मैदान के समीप लगने वाले हाट में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है. यहां न तो पेयजल की व्यवस्था है और न ही साफ-सफाई का कोई उचित प्रबंध. इस हाट में शाक-सब्जी से लेकर छोटे-बड़े मवेशी तक का व्यापार होता है. जिसमें कई जगहों से व्यापारी आते है. यहां […]
