प्रतिनिधि, रामगढ़प्रखंड के उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय सिमलदुमा में सात सालों से चापानल खराब पड़ा है. इससे स्कूल में पेयजल संकट उत्पन्न हो गया है. छात्रों के पेयजल व एमडीएम के लिए दूसरे टोला से पानी लाना पड़ रहा है. छात्र पढ़ाई के दौरान पानी पीने घर चले जाते हैं, जिससे उनका पठन पाठन प्रभावित होता है. स्कूल सचिव महेंद्र राय ने बताया कि वर्ष 2007-08 में स्कूल निर्माण के क्रम में चापानल के लिए 180 फीट बोरिंग कराया गया था, लेकिन पानी नहीं निकला तब से यहां पेयजल की किल्लत है. लेकिन इस दिशा में अब तक प्रशासन द्वारा किसी प्रकार की पहल नहीं किये जाने से छत्र पेयजल समस्या से जूझ रहे हैं. छह गांवों में पेयजल संकट इधर प्रखंड के नक्सल प्रभावित क्षेत्र सरूआपानी, साधुडीह, कटहलडीह, पहाडि़या टोला, कांगवारा तथा मंडरों में पेयजल संकट से ग्रामीण परेशान हैं. आदिवासी बहुल सरूआपानी गांव में 80 परिवारों में पेयजल के लिए एक भी चापानल नहीं है. ग्रामीण बहियार का पानी पीने को विवश हैं. वहीं कटहलडीह पहाडि़या टोला में 15 परिवार में एक भी चापानल नहीं है. जबकि कांगवारा में 7 में से 4 चापानल एवं मंडरों में 3 में दो चापानल बेकार पड़े हैं. महुबन्ना मुखिया संतोष किस्कू ने बीडीओ से खराब चापानलों को ठीक कराने की मांग की है. …………………..फोटो 24 रामगढ़ 3 स्कूल भवन के पीछे बेकार पड़ा चापानल. ………………………
पेयजल संकट से जूझ रहे स्कूली बच्चे
प्रतिनिधि, रामगढ़प्रखंड के उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय सिमलदुमा में सात सालों से चापानल खराब पड़ा है. इससे स्कूल में पेयजल संकट उत्पन्न हो गया है. छात्रों के पेयजल व एमडीएम के लिए दूसरे टोला से पानी लाना पड़ रहा है. छात्र पढ़ाई के दौरान पानी पीने घर चले जाते हैं, जिससे उनका पठन पाठन प्रभावित होता […]
