प्र्रतिनिधि, सरैयाहाटप्रखंड मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर अवस्थित आदिवासी गांव बेहंगा में बिजली व पेयजल की घोर समस्या है. इस गांव की आबादी करीब 250 है पर दो चापानल ही है. उसमें भी एक चापानल से गंदा पानी ही निकलता है. एक ही चापानल के सहारे गांव के लोग निर्भर है. राज्य बनने के बाद भी बिजली भी अबतक नहीं पाया है. इस बाबत कई बार विभाग को लिखित जानकारी दी गयी है. लेकिन कोई कार्यवाही अभी तक नहीं हुई है. आधा किलोमीटर दूर चंदुबथान गांव में बिजली जलती है.चुनाव के समय सभी पार्टी के नेता वोट मांगने आते है और यह वादा कर जाते है कि बिजली इसबार गांव में अवश्य लगेगी. पर वोट के बाद कभी कोई नेता गांव नहीं आता है.करमा टुडू -गांव में पेयजल व बिजली का समस्या काफी दिनों से है पर इसका निदान कोई नहीं कर रहा है. सभी नेता को वोट से मतलब रखता है. प्रधान बास्कीगांव में एक ही चापानल है हमेशा चापानल पर भीड़ लगी रहती है. जबकभी उक्त चापानल खराब हो जाता है तो जोरिया या दूसरे गांव से पानी लाना पड़ता है.सोमरा बास्की-राम मुर्मू- बिजली नहीं रहने से लालटेन के सहारे ही रात गुजारना पड़ता है. राज्य गठन के बाद गांव में कोई विकास नहीं दिखायी देती है.————–फोटो-सरैयाहाटचारो की स्टांप तस्वीर–
बेहंगा गांव में अब तक नहीं पहुंची बिजली
प्र्रतिनिधि, सरैयाहाटप्रखंड मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर अवस्थित आदिवासी गांव बेहंगा में बिजली व पेयजल की घोर समस्या है. इस गांव की आबादी करीब 250 है पर दो चापानल ही है. उसमें भी एक चापानल से गंदा पानी ही निकलता है. एक ही चापानल के सहारे गांव के लोग निर्भर है. राज्य बनने के बाद […]
