ओके ::: मूलभूत सुविधायों से वंचित खजूरडंगा व जोलों गांव

बिचौलियों के हावी होने से ग्रामीणों को नहीं मिलता योजनाओं का लाभप्रतिनिधि, गोपीकांदर सरकार द्वारा पहाडि़या के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन बिचौलियों के हावी रहने से ग्रामीणों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है. 50 परिवार की आबादी वाले खजूरडंगाल और जोलों इन दोनों गांव में कुछ को […]

बिचौलियों के हावी होने से ग्रामीणों को नहीं मिलता योजनाओं का लाभप्रतिनिधि, गोपीकांदर सरकार द्वारा पहाडि़या के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन बिचौलियों के हावी रहने से ग्रामीणों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है. 50 परिवार की आबादी वाले खजूरडंगाल और जोलों इन दोनों गांव में कुछ को ही सरकारी आवास का लाभ मिल पाया है. वह भी अधूरा पड़ा है. जोलों के ग्रामीण संतोष कुंवर व रूपलाल देहरी का इंदिरा आवास अधूरा है. खजूरडंगाल के नाजीर मुर्मू का आवास 10 वर्षों से अधूरा पड़ा है. इन दस वर्षों में लाभुक की मृत्यु हो गयी है, फिर भी इस दिशा में कोई पहल नहीं की गई है. इस गांव में पठन पाठन का कार्य भी लचर स्थिति में है, यहां विद्यालय भवन है, लेकिन नियमित नहीं खुलता है. इससे अध्ययन कार्य बाधित है. कंप्यूटर, लैपटॉप व टैब के इस आधुनिक युग में भी यहां के ग्रामीण ढ़ीबरी युग में जीने को विवश हैं. यहां दो वर्ष पहले बिजली के लिए तार व पोल लगाया गया था, लेकिन विभागीय उदासीनता की वजह से अब तक बिजली आपूर्ति नहीं करायी गयी. ग्रामीण श्यामलाल देहरी, सुरेंद्र देहरी, सोनाय मांझी, कमलाकांत मांझी ने बताया कि साल में बरबटी फसल उगाकर इससे प्राप्त लकड़ी बेचकर जीविका चला रहे हैं. यहां सिंचाई के अभाव में हरी सब्जी, गेहंू, सरसों आदि का उपज नहीं हो पाता है. ग्रामीणों ने बताया कि अगर इन गांवों में सिंचाई की व्यवस्था हो जाय, तो यहां के किसानों को यहां वहां भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी. …………………………फोटो 17 गोपीकांदर 1 अधूरे पड़े इंदिरा आवास को दिखाते ग्रामीण.

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