दुमका : झारखंड आंदोलनकारी मोरचा द्वारा शनिवार को कचहरी परिसर में एक दिवसीय धरना दिया गया तथा झारखंड-वनांचल आंदोलनकारी चिह्न्तिीकरण आयोग से ‘वनांचल’ शब्द को हटाते हुए आयोग की समय सीमा का विस्तार करने की मांग की गयी.
साथ ही साथ चिह्न्ति होने से वंचित रह गये आंदोलनकारियों के नाम जोड़ कर ही प्रक्रिया को पूर्ण कराने पर जोर दिया गया. कार्यक्रम के जरिये राज्यपाल को संबोधित नौ सूत्री ज्ञापन उपायुक्त को सौंपा गया. धरना सभा को संबोधित करते हुए मोरचा के केंद्रीय संयोजक प्रेमचंद किस्कू ने प्रक्रिया में थोड़ी बदलाव करते हुए आंदोलनकारियों को वर्गीकृत किये बगैर सभी को सम्मान राशि, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सुविधा, आश्रितों को नि:शुल्क उच्च शिक्षा, नियोजन में प्राथमिकता एवं आंदोलन में जान गंवाने वाले आंदोलनकारियों के आश्रितों को राज्य की नौकरियों में सीधी नियुक्ति देने की मांग की.
