रामगढ़. रामगढ़ प्रखंड में गर्मी की दस्तक शुरू होते ही पेयजल संकट आरंभ हो गया है. यहां पेयजल की समस्या उत्पन्न होने का सबसे बड़ा कारण है यहां 200 से अधिक चापानल बेकार पड़े हैं, जिसमें ग्रामीण गाय बकरी बांधते हैं. कांजो पंचायत के सिमरा गांव में 7 चापालन खराब पड़ा है. इसके अलावा कान्वे, सिलठा बी, सुसनिया, ठाड़ीहाट, पहाड़पुर, सिलठा ए आदि पंचायतों में भी पेयजल की स्थिति बदतर है. भतोडि़या ए के नंदनकूप गांव में एक भी चापानल नहीं है. यही वजह है कि पहाडि़या व आदिवासी बहुल इस गांव के ग्रामीण तालाब का पानी पीने को विवश हैं. जिला प्रशासन द्वारा प्रत्येक मुखिया को उनके पंचायत में पेयजल की व्यवस्था कराने के लिए वर्ष 2011 12 में 2 लाख रुपये मुहैया कराया गया है. लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है. इस मामले में बीडीओ राज किशोर प्रसाद ने बताया कि सभी मुखिया को अपने अपने पंचायतों के सभी चापालनों की मरम्मती कराने का आदेश दे दिया गया है.
200 से ज्यादा चापानल पड़ा है बेकार
रामगढ़. रामगढ़ प्रखंड में गर्मी की दस्तक शुरू होते ही पेयजल संकट आरंभ हो गया है. यहां पेयजल की समस्या उत्पन्न होने का सबसे बड़ा कारण है यहां 200 से अधिक चापानल बेकार पड़े हैं, जिसमें ग्रामीण गाय बकरी बांधते हैं. कांजो पंचायत के सिमरा गांव में 7 चापालन खराब पड़ा है. इसके अलावा कान्वे, […]
