प्रतिनिधि, रामगढ़ एक शब्द औषधि करे, एक करे घाव यानी एक शब्द किसी के लिए औषधि का काम करती है, तो किसी के लिए घाव का. हमें अपनी वाणी में संयम रखना चाहिए. वाणी में संयम नहीं रहा, तो हमारे शब्द दूसरों को चोट पहुंचायेंगे. रिश्तों में जख्म बढ़ाने का काम करेंगे. महाभारत में कौरव व पांडव के बीच हुए युद्ध का सबसे बड़ा कारण वाणी की कटुता है. उक्त बातें आचार्य राहुल देव शास्त्री ने रामगढ़ के महुबन्ना स्कूल प्रांगण में आयोजित श्रीमद्भागवत में प्रवचन के दौरान कही. इस दौरान उन्होंने उपस्थित श्रोताओं को बताया कि जब दुर्योधन माया रूपी सरोवर में गिर गया, तो द्रौपदी ने कहा कि अंधा का बेटा अंधा, जरा सी उल्टी वाणी से महाभारत जैसी स्थिति सामने आ गई. उन्होंने लोगों को शब्द में संयम रखकर बोलने व वाणी में सौम्यता लाने के लिए प्रेरित किया और कहा कि शब्द संभाले बोलिए, शब्द के हाथ न पांव. श्रीमद्भागवत के अवसर पर यहां प्रात:काल विधिवत अनुष्ठान किया गया और संकीर्तन भी आयोजित किये गये. आचार्य राहुल देव शास्त्री के प्रवचन को सूनने के लिए आसपास के श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी थी. इस अवसर पर महुबन्ना श्रीमद्भागवत यज्ञ समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए भोजन व रात्रि विश्राम की भी व्यवस्था की गई है. ………………………..फोटो 02 रामगढ़ 1 व 2प्रवचन करते आचार्य राहुल देव शास्त्री व उपस्थित श्रोता………………………..
धार्मिक// एक शब्द औषधि करे, एक करे घाव : आचार्य राहुल शास्त्री
प्रतिनिधि, रामगढ़ एक शब्द औषधि करे, एक करे घाव यानी एक शब्द किसी के लिए औषधि का काम करती है, तो किसी के लिए घाव का. हमें अपनी वाणी में संयम रखना चाहिए. वाणी में संयम नहीं रहा, तो हमारे शब्द दूसरों को चोट पहुंचायेंगे. रिश्तों में जख्म बढ़ाने का काम करेंगे. महाभारत में कौरव […]
