प्रतिनिधि, रानीश्वर. करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार की गयी दो ग्रामीण जलापूर्ति योजनाएं मेंटेनेंस के अभाव में लंबे समय से बंद पड़ी हैं. इससे रानीश्वर, दुमका और मसलिया प्रखंड क्षेत्र के दर्जनों गांवों के लोग पेयजल सुविधा से वंचित हैं. करीब 36 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित रानीबहाल-महेशबाथान और गोबिंदपुर ग्राम समूह ग्रामीण जलापूर्ति योजनाएं पिछले करीब छह महीने से पूरी तरह बंद हैं.
मसानजोर डैम में इंटकवेल का निर्माण कर जलापूर्ति प्लांट और पानी की टंकियों के माध्यम से पाइपलाइन से गांवों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था की गयी थी. योजना के शुरू होने के बाद शुरुआती दौर में ग्रामीणों को घर-घर नल से पेयजल उपलब्ध कराया गया, लेकिन उचित रखरखाव नहीं होने के कारण धीरे-धीरे जलापूर्ति व्यवस्था चरमराती गयी.
2014 में शुरू हुई थी दोनों योजनाएं
मसानजोर डैम से पाइपलाइन के माध्यम से ग्रामीणों को घर-घर नल से पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 2014 में रानीबहाल-महेशबाथान ग्रामीण जलापूर्ति योजना और गोबिंदपुर ग्राम समूह ग्रामीण जलापूर्ति योजना शुरू की गयी थी.
रानीबहाल-महेशबाथान योजना के तहत मसानजोर डैम के धाजापाड़ा में जलापूर्ति प्लांट स्थापित किया गया था. यहां से दुमका और रानीश्वर प्रखंड के दर्जनों गांवों तक पाइपलाइन बिछाकर जलापूर्ति की गयी.
वहीं, गोबिंदपुर ग्राम समूह ग्रामीण जलापूर्ति योजना के लिए मसलिया प्रखंड के कोलारकोंदा में जलापूर्ति प्लांट स्थापित किया गया. यहां से मसलिया और रानीश्वर प्रखंड के दर्जनों गांवों तक पाइपलाइन के जरिये पानी पहुंचाने की व्यवस्था की गयी.
संवेदक के जिम्मे रहने तक चलती रही व्यवस्था
ग्रामीणों के अनुसार, शुरुआती दौर में जब दोनों योजनाओं की जिम्मेदारी संवेदक कंपनी के पास थी, तब गांवों तक जलापूर्ति होती रही. हालांकि, अंतिम छोर के गांवों में नियमित रूप से पानी नहीं पहुंच सका और वहां महज एक-दो महीने तक ही जलापूर्ति हो पायी.
इसके बाद मेंटेनेंस की व्यवस्था कमजोर होती गयी और धीरे-धीरे जलापूर्ति का दायरा सिमटता चला गया. अंतत: पिछले करीब छह महीने से दोनों योजनाएं पूरी तरह बंद हैं.
मोटर खरीद के लिए निविदा, लेकिन कब शुरू होगा पानी पता नहीं
जलापूर्ति योजनाओं को दोबारा चालू करने के लिए विभाग की ओर से प्लांट के लिए मोटर खरीदने को लेकर निविदा आमंत्रित की गयी थी. इसके बावजूद योजनाओं की मरम्मत कब पूरी होगी और ग्रामीणों को दोबारा कब पानी मिलेगा, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही है.
सबसे बड़ी परेशानी यह है कि ग्रामीण जब जलापूर्ति शुरू होने की जानकारी लेने के लिए ग्रामीण पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के जेई या एई से फोन पर संपर्क करते हैं, तो कई बार अधिकारी यह कहकर बात टाल देते हैं कि संबंधित क्षेत्र उनके कार्यक्षेत्र में नहीं आता.
दो अंचलों में बंटा है पेयजल एवं स्वच्छता विभाग
दुमका जिले में कुल 10 प्रखंड हैं. ग्रामीण पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने पांच-पांच प्रखंडों को अंचल-1 और अंचल-2 में बांट रखा है. दोनों अंचलों के लिए अलग-अलग कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता और कनीय अभियंता पदस्थापित हैं.
ऐसे में योजनाओं के बंद रहने और ग्रामीणों की पेयजल समस्या के बीच जिम्मेदार विभागीय अधिकारी की स्पष्ट जवाबदेही तय नहीं हो पा रही है.
18-18 करोड़ रुपये की लागत से बनी हैं योजनाएं
जानकारी के अनुसार, रानीबहाल-महेशबाथान ग्रामीण जलापूर्ति योजना का निर्माण करीब 18 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है. वहीं गोबिंदपुर ग्राम समूह ग्रामीण जलापूर्ति योजना पर भी करीब 18 करोड़ रुपये खर्च किये गये हैं.
कुल 36 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद दोनों योजनाओं का लंबे समय से बंद रहना सरकारी योजनाओं के रखरखाव और मॉनिटरिंग व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है. ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च कर जलापूर्ति का ढांचा तैयार करने के बाद यदि नियमित मेंटेनेंस नहीं हो, तो इसका लाभ आम लोगों तक पहुंचाना मुश्किल है.
